hindmedianews
Breaking News
क्राइमछत्तीसगढ़ब्रेकिंग न्यूज़शिक्षा

प्रधानपाठक बाल अधिकारों का उड़ा रहे है धज्जियाँ , भरे धूम में शिक्षा के जगह बसंत ऋतु में लगवा रहे है पौधा

IMG-20250714-WA0596
previous arrow
next arrow
0 आदिवासी, बैगा बाहुल्य दमगढ़ का मामला

~ संवाददाता, अजय जांगड़े ~
कवर्धा : कबीरधाम जिला में कुछ दिनों से शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कुलो के शिक्षकों का आतंक बढ़ते जा रहा है हाल ही में कवर्धा विकासखण्ड के निजी स्कूल गुरुकुल में यौन शोषण में बस के कंडक्टर , प्रचार्य , वाइस प्रिंसिपल और कक्षा शिक्षक जेल में है वही जैतपुरी के प्रधानपाठक और एक शिक्षक भी उसी तरह के मामले में जेल गए है । बोड़ला विकासखण्ड के वनांचल ग्राम बोककरखार में संकुल समन्वयक ने छात्रावास के एक छात्र की पिटाई कर दिया । पीड़ित छात्र ने चिल्फी थाना में कार्यवाही के लिखित शिकायत किया है वही पंडरिया विकास खंड के संकुल केन्द्र कुंई अधिनस्त शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला दमगढ़ में पतझड़ के समय मे भरे धूप पौधारोपण के नाम पर स्कूली छात्रों से कार्य कराया जा रहा है जिसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है ।
शिक्षा प्राप्त करने गए छात्र – छात्राओं को मजबूर कर मजदूरों वाला कार्य कराया जाता है। शिक्षक बच्चों से लेते हैं काम , बच्चों की भावनाओं के साथ करतें हैं खिलवाड़ ।
विडम्बना है कि छत्तीसगढ़ व केन्द्र सरकार की अथक प्रयासों के बाद भी नहीं सुधर रहें शिक्षा का स्तर ,शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार क्या-क्या नहीं कर रही है । विद्यालयों मे छात्र छात्राओं की मानसिक व शारीरिक विकास के लिए भोजन ,ड्रेस व खेलकूद सहित शिक्षण सामाग्री मुहैया कराई जाती ताकि किसी भी कमजोरी या कमी के कारण बच्चों को पढ़ाई छोड़ना नहीं पड़े। लेकिन इस दमगढ़ का प्रधान पाठक महोदय के द्वारा विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों को उनके बाल्यावस्था काल कि भोले भाले, मासूमियत का फायदा उठाकर विद्यालय परिसर में ही कार्य कराया जाता है । ऐसे में सरकार की आदेश निर्देश व शिक्षा विभाग के पदाधिकारी की गरिमा ऐसे शिक्षकों के पैरों के नीचे प्रतीत होता नजर आ रहा है ।
हमारे देश की संविधानं और संस्कृति भी यहीं कहतीं हैं बाल्यकाल नादानी के साथ साथ देवी देवताओं की रूप होते हैं ।
शोषण के अनेकानेक रूप होते हैं चाहे शारीरिक और मानसिक रूप से क्यो ना हो, बात कवर्धा के गुरुकुल स्कूल की हो या फिर पिपरिया में घटित हुई घटनाओं कीं हो । शोषण तों शोषण ही है, हां अंतर जरूर है थोड़ा। क्या दमगढ़ के इस प्रधान पाठक को ज्ञान नहीं । ग्राम पंचायत दमगढ़ एक अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है जहां भोले भाले ग्रामीण जनों के मासूम बच्चे अध्ययन करने विद्यालय आते हैं लेकिन साफ-सफाई की आढ़ में छात्र छात्राओं से शारीरक व मानसिक रूप से शोषण किया जाता है जों किसी दांडिक अपराध से कम नहीं ।
आखिरकार क्यों असमर्थता जताई जाती है ऐसे ज्ञान रहित शिक्षकों के कार्य शैली में संवैधानिक कार्यवाही करने में ।
अधिनियम के प्रावधान
बच्चों ’ की परिभाषा: 2016 के संशोधित अधिनियम ने “बच्चे” की परिभाषा को ऐसे व्यक्ति के रूप में बदल दिया है जो 14 वर्ष की आयु तक नहीं पहुंचा है या बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम 2009 के अधिकार में प्रदान की गई आयु, जो भी अधिक हो।
बाल श्रम अब एक संज्ञेय अपराध है: बाल श्रम अधिनियम के तहत दंडनीय कोई भी नियोक्ता द्वारा किया गया अपराध अब एक संज्ञेय अपराध है। नतीजतन, अधिकारी प्राथमिकी दर्ज कर सकते हैं, जांच शुरू कर सकते हैं और बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकते हैं।
जिला मजिस्ट्रेट का अधिकार: जिला मजिस्ट्रेट के पास यह सुनिश्चित करने का अधिकार है कि संशोधित कानून की आवश्यकताओं को उचित रूप से लागू किया गया है।
 बाल श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन आधिनियम 1986 की धारा 14 के अनुसार बाल श्रम करवाने वाले नियोक्ता को 3 माह से 1 वर्ष तक का कारावास या 10 हजार से 20 हजार तक का जुर्माने से दंडित किया जा सकता है। लेकिन शासकीय सेवक के द्वारा यह कृत्य किए जानें पर क्या कार्यवाही होगी ।

संबंधित पोस्ट

पाली विकासखंड की शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल:पूर्व माध्यमिक शाला रजकम्मा मे बच्चों से ढोवाया गया बेंच, बाल अधिकारों का उल्लंघन…!

hindmedianews

कलेक्टर ने धान, अरहर, सोयाबिन और उद्यानिकी उत्पादक किसानों को फसल बीमा कराने के निर्देश दिए

hindmedianews

मजदूरों की सुरक्षा में लापरवाही! सेजबहार GEC बिल्डिंग साइट पर बड़ा हादसा, महिला की दर्दनाक मौत

Sakshi Bansod

महेश चंद्रवंशी पंडरिया विधान सभा सहित ठाठापुर क्षेत्र में विभिन्न कार्यक्रमों में हुए शामिल

hindmedianews

हत्या के प्रयास करने वाले आरोपियों को लोरमी पुलिस ने किया गिरफ्तार

rakeshbhaskar

*जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का उद्देश्य हो रहा सार्थक* *देश-विदेश के पर्यटक आ रहे हैं संग्रहालय* *विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा आम लोगों के लिए बना प्रेरणा और ज्ञान का केन्द्र* *उद्घाटन के लगभग दो महीनों में 72 हजार से अधिक लोगों ने किया अवलोकन*

Chunesh Sahu