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The game of AUTOPSY..part_2 *नोटिस के खेल में डॉक्टर फेल… जांच समिति करेंगी कार्यवाही….* *बड़ी कार्यवाही होने के आसार…..जांच समिति में होगी फिर से खेला या….??.??..*

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छत्तीसगढ़ /धमतरी,

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में इन दिनों निजी अस्पतालों समेत अब सरकारी अस्पताल की लापरवाही एक बार फिर हुई है,
वहीं इस लापरवाही के चलते मामला संज्ञान में आते ही सिविल सर्जन द्वारा संबंधित डॉक्टर को नोटिस देकर दो दिवस के भीतर जवाब तलब करने जारी किया गया था, लेकिन सिविल सर्जन की मानें तो डॉक्टर जवाब से संतुष्ट नहीं हैं…..।

*जानें क्या है मामला…*

जानकारी के मुताबिक बगस सोनवानी पिता रामदयाल सोनवानी 65 वर्ष अपनी बेटी को उसके मायके छोड़ने पिकअप वहां में लेकर ग्राम कोड़ापार से छाती जा रहा था..इस दौरान भाठागांव के पास विपरीत दिशा से आ रहे दूध टैंकर और पिकअप में जबरदस्त टक्कर हो गया। भिड़ंत में बगस सोनवानी पिता रामदयाल सोनवानी 65 वर्ष व उनकी पुत्री को गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें कुरूद अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती करवाया गया लेकिन बगस सोनवानी की स्थिति गंभीर होने कर कारण उन्हें धमतरी जिला अस्पताल रेफर किया गया……
जहां जिला अस्पताल धमतरी में उनकी उपचार के दौरान मृत्यु हो गई…मृत्यु पश्चात डॉक्टर द्वारा शव को बिना पोस्टमार्टम किए परिजनों को सौंप दिया गया। जिसे परिजनों ने अपने गांव लाकर अंतिम संस्कार भी कर दिया।

जिले में यह दूसरा बड़ा
मामला है जिसमें अधिकारी अपने कर्मचारियो को बचाने की फिराक में सिर्फ नोटिस नोटिस का खेल खेल रहे है, मामले में सिविल सर्जन ने नोटिस के जवाब से असंतुष्टि जताई है…इस बार कोई बड़ी कार्यवाही के आसार नजर आ रहा है।

*जब सिविल सर्जन डॉ A.K.टोंडर से मामले में पक्ष लिया गया तो उनका कहना है कि जवाब जो दिया गया है उनसे असंतुष्ट हैं आगे जांच समिति बनाई जाएंगी जांच के बाद विधिवत् कार्यवाही संबन्धित डॉक्टर के खिलाफ़ की जावेगी…*

 

*क्या था निजी अस्पताल का ममला..*

वहीं जब निजी अस्पताल से पोस्टमार्टम बगैर शव परिजनों को सौंपने का मामला हमने उठाया था जिसे राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक अधिकारियों से मिलीभगत के चलते निजी अस्पताल संचालक से मामूली अर्थदंड लेकर मामले को रफादफा कर दिया गया।

इस मामले में निजी अस्पताल संचालक उन दिनों लगातार जिला कार्यालय के चक्कर काटते दिखाई दे रहा था, जो अधिकारियों से मिलीभगत कर लिया था, जिम्मेदारों ने महज मामूली से अर्थदंड अधिरोपित कर मामले की विज्ञप्ति जारी कर दी। सूत्र में मुताबिक इस मामले में तत्कालीन मुखिया का बड़ा हाथ रहा। नहीं तो विभागीय चिकित्सा अधिकारी अपनी बोली हुई जुबां से नहीं मुकरते, लेकिन दबाव के चलते जिला प्रशासन के आगे उन्हें भी नतमस्तक होना पड़ा।

बहरहाल देखना होगा कि मामले में क्या कार्यवाही किया जाएगा, या यूं ही जिम्मेदार अधिकारी ऐसे मामलों में बढ़ोतरी लाने मौन सहमति देंगे…. और छोटी मोटी कारवाई कर अपना बचाव करेंगे…. या कोई बड़ी कार्यवाही की जाएगी जिससे कि भाविष्य में इस तरह होने वाले कृत्यों में कमी लाई जा सकें और डॉक्टर भी विधिवत् रूप में अपनी सेवाएं दे।

चुनेश साहू 7049466638

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