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भुपेश सरकार किसानो को खुन के आंसु रुला रही हैं- आभा तिवारी 

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राजनांदगाँव // भुपेश सरकार को असफल सरकार  बताते हुए पुर्व पार्षद आभा तिवारी ने कहा कि राज्य सरकार ने खाद बांटने में भी भारी गड़बड़ी और घोटाला किया है ।उसके कारण आज किसानों को खाद की कमी का सामना करना पड़ रहा है  प्रदेश में किसान खाद और बीज के लिए परेशान हैं तथा सरकार 70 प्रतिशत खाद व्यापारियों को दे रही है, जबकि सोसायटियों में सिर्फ 30 प्रतिशत खाद पहुंचा रही है वहीं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के कार्यकाल में आप लोगो को ज्ञात होगा कि 15 सालों तक भाजपा शासनकाल में बिजली और खाद के लिए किसानों को कभी परेशानी नहीं हुई. आज बिजली कटौती के कारण किसान अपने फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं. सरकार अपनी जिम्मेदारियों से भाग रही है. ढाई साल के सरकारी की उपलब्धि बताने के लिए कांग्रेस के पास जीरो बटे सन्नाटा है. बिहार के चारा घोटाले की तरह छत्तीसगढ़ का गोबरा घोटाला होने वाला है यह भी जल्द ही जनता के सामने एक्सपोज होगा.भुपेश सरकार के रोका-छेका अभियान असफल आज नेशनल हाईवे पर भी मवेशी नजर आ रहे हैं. गोठान योजना का कोई अता पता नहीं है.

आभा तिवारी ने कहा कि रोका-छेका मतलब पशुओं को खुले में चरने के लिए नहीं छोड़ा जाता है. मवेशियों को घरों, शेड और गौठानों में रखा जाता है. जहां उनके लिए पानी और चारे की व्यवस्था होती है. प्रदेश के लगभग सभी जिलों में मवेशियों को रखने के लिए गौठानों की व्यवस्था की गई है. जहां मवेशियों को रखा जा रहा है. साथ ही उनके चारे की भी व्यवस्था की गई है. मवेशियों को संरक्षित करना फसलों को मवेशियों से बचाना और गोबर से कुदरती खाद बनाना इसका मकसद है. भुपेश सरकारा तो मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों के साथ भी धोखा कर रही है.जो काम मजदूरों कों करना है वह मशीन से करा रही है. कांग्रेस सरकार अपनी अयोग्यता और असफलता को छुपाने का जरिया प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखना बना लिया है, एक तो इस सरकार ने घोषणा पत्र में किए वादों को पूरा नहीं किया. और दूसरा, धान खरीदी के समय रकबा में कटौती कर किसानों को खून के आंसू रुलाए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार लगातार किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्यों को लेकर काम कर रही है. किसानों के हित में कई बड़े फैसले केंद्र की सरकार ली लेकिन दूसरी ओर छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार है जो कहने को तो किसान हितैषी बनती है, लेकिन पिछले ढाई साल में इस सरकार ने किसानों को ठगने और धोखा देने के अलावा कुछ नहीं किया. खाद की किल्लत को लेकर केंद्र सरकार पर आरोप लगाकर भूपेश सरकार किसानों को गुमराह कर रही है. झूठ बोलकर अपनी गलती केंद्र पर मढ़ना चाहती है, केंद्र सरकार ने जितनी खाद की मांग की थी. उतना खाद छत्तीसगढ़ को भी भेजा है. लेकिन राज्य सरकार ने खाद बांटने में भी भारी गड़बड़ी और घोटाला किया है खाद की कमी बताकर नकली खाद बेचने वाले माफिया, किसके संरक्षण में फल- फूल रहे हैं

केंद्र सरकार सभी राज्यों के साथ समान व्यवहार करती है आवश्यकता अनुरुप नितिगत हर राज्यों को जन सुविधायुक्त कार्य करती है लेकिन भुपेश सरकार को केवल अपनी सुविधा की चिंता है आज किसान भुपेश सरकारा से सवाल कर रही है खाद का सही वितरण ना करने वालों पर सरकार द्वारा क्या कार्रवाई की जा रही है ?

जब किसानों को खाद मिला ही नहीं तो आखिर खाद कहां गया? केंद्र सरकार से हर साल कि तुलना इस साल जो अतरिक्त खाद की मांग की है उसका किसानो को हिसाब दो छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन में लगभग 48 लाख हेक्टेयर में विभिन्न फसलों की बुआई की जाती है. खरीफ में धान और अन्य अनाज 40.50 लाख हेक्टेयर, दलहन 3.76 लाख हेक्टेयर, तिलहन 2.55 लाख हेक्टेयर तथा अन्य फसल 1.32 लाख हेक्टेयर में बुआई की जाती है. इसके लिए राज्य सरकार ने केंद्र से खरीफ फसल 2021 के लिए 10.25 लाख मैट्रिक टन खाद की मांग की थी. जिसकी स्वीकृति एवं आपूर्ति भी केंद्र सरकार ने की है. लेकिन अब अचानक सीएम भूपेश बघेल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर डेढ़ लाख मैट्रिक टन यूरिया और डेढ़ लाख मैट्रिक टन डीएपी खाद की मांग कर रहे हैं आखिर क्यों??? सवाल अनेक किंतु भुपेश सरकारा के पास जवाब एक भी नहीं भुपेश सरकार का सोच चले के बेरा हें जतका चाहों रपोट लो ।

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