
रायपुर।
इस निर्णय के तहत राज्य के लगभग साढ़े पांच लाख से अधिक अधिकारी एवं कर्मचारियों की आकस्मिक अवकाश (CL) और अर्जित अवकाश (EL) पर अस्थायी रूप से प्रतिबंध लागू किया गया है। सरकार के इस कदम को प्रशासनिक कार्यों में गति और अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की उप सचिव अंशिका पांडे द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि बिना पूर्व अनुमति के अवकाश लेने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आदेश के अनुसार, यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी बिना स्वीकृति के छुट्टी पर जाता है, तो उसे “सर्विस ब्रेक” के रूप में माना जाएगा, जिससे उसकी सेवा संबंधी रिकॉर्ड पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
सरकार के इस निर्णय के पीछे मुख्य कारण आगामी महत्वपूर्ण प्रशासनिक और जनहितकारी कार्यक्रम बताए जा रहे हैं। राज्य में जल्द ही व्यापक स्तर पर जनगणना कार्य प्रारंभ होने वाला है, जिसमें बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों की सहभागिता आवश्यक होगी।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री द्वारा राज्यव्यापी “लोक सुराज अभियान” भी संचालित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य शासन की योजनाओं को सीधे आम जनता तक पहुंचाना और उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण करना है।
सूत्रों के अनुसार, इन दोनों ही कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए प्रशासनिक अमले की पूर्ण उपस्थिति और सक्रियता अत्यंत आवश्यक है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की प्रशासनिक बाधा उत्पन्न न हो और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
हालांकि, आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में सक्षम अधिकारी की अनुमति से अवकाश प्रदान किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए ठोस कारण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। सामान्य परिस्थितियों में किसी भी प्रकार की छुट्टी को स्वीकृति नहीं दी जाएगी।
इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां एक ओर कुछ कर्मचारी इसे प्रशासनिक आवश्यकता मानते हुए समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ वर्ग इसे कठोर कदम बताते हुए असुविधाजनक भी मान रहे हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि व्यक्तिगत और पारिवारिक आवश्यकताओं के चलते कभी-कभी अवकाश लेना अनिवार्य हो जाता है, ऐसे में पूर्ण प्रतिबंध से परेशानी हो सकती है।
वहीं प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर होने वाले कार्यों जैसे जनगणना और लोक सुराज अभियान के लिए इस प्रकार के निर्णय जरूरी होते हैं। इससे कार्य में निरंतरता बनी रहती है और लक्ष्य समय पर पूरे किए जा सकते हैं।
सरकार ने सभी विभागों को निर्देशित किया है कि वे इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को इसकी जानकारी दें। साथ ही, विभाग प्रमुखों को यह भी जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे कार्यों की प्रगति पर नियमित निगरानी रखें और किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनुपस्थिति पर तत्काल कार्रवाई करें।





