hindmedianews
Breaking News
छत्तीसगढ़देश-विदेशधर्मब्रेकिंग न्यूज़शिक्षास्वास्थ्य

जिले में 18 मार्च तक मानाया जाएगा विश्व ग्लूकोमा सप्ताह

IMG-20250714-WA0596
previous arrow
next arrow

कवर्धा,  किसी भी प्राणी के लिए आंख का महत्व तब पता चलता है जब उसे अंधेरे में कुछ समय के लिए रहना पडे़, एक पल में पता चल जाता है कि बिना उजाला के किस प्रकार हम असहत हो जाते है, इससे कोई भी अनभिज्ञ नहीं है। इस वर्ष ग्लूकोमा दिवस 12 से 18 मार्च तक मनाया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ सुजॉय मुखर्जी ने बताया कि इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए हर साल वर्ल्ड ग्लूकोमा डे और वर्ल्ड ग्लूकोमा सप्ताह मनाया जाता है। ग्लूकोमा आखों से जुडी एक बीमारी है। इसे काला मोतियाबिंद भी कहा जाता है। आमतौर पर लोगों की यही पता है कि यह बीमारी अगर एक बार हो जाये तो आंख अंधा कर देती है। आमजनों में आंखो से संबंधित जागरूकता, चिकित्सीय परामर्ष का आयोजन किया जा रहा है। इस दिवस का मुख्य उददेश्य ऑप्टिक तंत्रिका परीक्षण सहित नियमित आंखों की जॉच के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने ग्लूकोमा दवारा होने वाले अंधेपन को समाप्त करना है। उन्होने बताया कि इस समस्या के दौरान आखो मे तरल पदार्थ का दबाव बढ़ जाता है। षुरूवाती अवस्था में न तो इस बीमारी के कोई लक्षण प्रकट होते हैं और न ही कोई संकेत। पल पल की देरी मरीज को उसकी दृष्टि से दूर करती चली जाती है।

डीपीएम सृष्टि शर्मा ने बताया कि वर्ड ग्लूकोमा डे और सप्ताह के अतंर्गत प्रत्यक सीएचसी स्तर एवं जिला चिकित्सालय में नेत्र सहायक अधिकारी के द्वारा नेत्र की जॉच कर उन्हे उचित परामर्श दिया जा रहा है। आए हुए मरीजों को आवश्यकता होने पर चश्मा दिया जा रहा है। इस अवसर पर जिला चिकित्सायल में सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक डॉ एम सुर्यवंशी, रीना आहुजा अस्पताल सलाहकार, बालाराम साहू जिला समन्वयक रेडक्रास, अश्वनी शर्मा नेत्र सहायक अधिकारी, पार्षद संतोष यादव तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पिपरिया में डॉ सतीश चंद्रवंशी बीएमओ, नेत्र सहायक बीडी गहरवाल, एल के सोनी, एन जांगड़े सहित स्टॉफ उपस्थित रहे।

लक्षणः –

ग्लूकोमा के लक्षण अत्यंत सामान्य और स्पष्ट होते है जिसे हम समझ नहीं पाते या नदरअंदाज कर अंजाने ही विलम्ब कर बैठते है, अतः हमें इन सामान्य एव अस्पष्ट लक्षणां के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है। सिर और भौंहों के आसपास निरन्तर दर्द का बने रहन जो शाम को अपेक्षाकृत तेज हो जाता है। पढ़ने के चश्मे का नम्बर जल्दी जल्दी बदलना। सामान्यतया पढ़ने पर नम्बर 2 साल में बलदता है। चॉद, बल्ब एवं अन्य प्रकाश स्त्रोंतो के चारों ओर रंगीन इन्द्रधनुषी वलय घेरे दिखाई पड़ना। दृष्टि का दायरा कम होना अर्थात सामने देखते हुए अगल बगल की चीजें धुंधली दिखना या दिखाई पडना।डार्क एडाप्टेशन टाईम का बढ़ जाना अर्थात उजाले से अंधेरे में जाने पर ऑखों को अंधेरे का अभ्यस्त होने से ज्यादा समय लगना। अगर ऐसे लक्षण महसूस हो तो तत्काल ही नेत्र विशेषज्ञ से अपनी ऑखों की जॉच करानी चाहिए। उन्होंने बताया कि ग्लॅॅूॅकोमा कांचबिंद किसे हो सकता है सामान्यतया ग्लाकोमा 40 वर्ष की उम्र के बाद होने वाली बिमारी है। अतः 40 के बाद हर व्यक्ति को प्रति वर्ष अपनी ऑखों की जॉच नेत्र विषेषज्ञ से विशेषतः ग्लकोमा के लिए करानी चाहिये। जिनके परिवार में ग्लॉकोमा बिमारी रही हो,जिनकी ऑखों में चोंट लगी हो। जिनको अधिक नम्बर का चश्मा लगा हो। जिनको ब्लड प्रेशर और मधुमेह की बिमारी हो।

उपचारः-

उन्होंने बताया कि ग्लॉकोमा से हुए नुकसान की भरपाई सम्भव नहीं है किन्तु नियमित जॉच एवं नेत्र विषेषज्ञ की सलाहनुसार दवाओं के सेवन से आंखों की बची हुई दृष्टि को सुरक्षित रखा जा सकता है। नियमित जॉच से ही इस बिमारी को प्रारंभिक अवस्था से पहचाना जा सकता है तथा इसके दुष्परिणामों को नियंत्रित किया जा सकता है। अतः 40 वर्ष के बाद प्रतिवर्ष अपनी ऑखों की जॉच ग्लॉकोमा के लिए करानी चाहिए।

संबंधित पोस्ट

महिलाओं की टीकाकरण में रही विशेष सहभागिता

Admin

NCF-2020 की रुपरेखा पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में किया प्रतिभाग

hindmedianews

*सतनाम के धरोहर बाबा जैतखाम का अदभुत रहस्य ग्राम ॳवरी में* *भक्तों में सतनाम बाबा घासीदास पर बढ़ी आस्था*

Chunesh Sahu

*छत्तीसगढ ओलंपिक खेल 2022- 23 खेल का एक दिवसीय आयोजन*

Chunesh Sahu

पीएमश्री शालाओं की गतिविधियों का किया गया जिला स्तरीय आयोजन

Chunesh Sahu

बोड़ला में विकास की बड़ी सौगात 12 कार्यों के लिए 3.62 करोड़ की मंजूरी, नगरवासियों में खुशी

Sakshi Bansod