
खैरागढ़–छुईखदान–गंडई,
जिला खैरागढ़–छुईखदान–गंडई में विकास की असमानता एक बार फिर उजागर हो गई है। जहां एक ओर खैरागढ़ और गंडई जैसे क्षेत्रों में फायर ब्रिगेड जैसी अत्यावश्यक सुविधा उपलब्ध है, वहीं छुईखदान आज भी इस बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था से वंचित है। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन और संपत्ति के लिए एक गंभीर खतरा भी बनती जा रही है।
छुईखदान क्षेत्र में आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। कभी खेतों में आग लगने से किसानों की मेहनत राख हो जाती है, तो कभी घरों में शॉर्ट सर्किट के कारण लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। कई बार दुकानों और छोटे व्यवसायों में अचानक आग भड़कने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिनमें लाखों रुपए का नुकसान हो चुका है। इन सभी घटनाओं में एक समान समस्या सामने आती है—समय पर आग बुझाने के लिए कोई स्थानीय व्यवस्था मौजूद नहीं है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आग लगने की सूचना देने के बाद खैरागढ़ या गंडई से फायर ब्रिगेड को बुलाया जाता है, लेकिन दूरी अधिक होने के कारण वाहन के पहुंचने में काफी समय लग जाता है। इस देरी के चलते आग तब तक विकराल रूप ले चुकी होती है और नुकसान को रोक पाना लगभग असंभव हो जाता है।
ग्रामवासियों और व्यापारियों ने कई बार प्रशासन से छुईखदान में फायर ब्रिगेड केंद्र स्थापित करने की मांग की है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है। लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि जब अन्य क्षेत्रों में यह सुविधा उपलब्ध है, तो छुईखदान को क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए सुरक्षा सेवाओं का मजबूत होना बेहद जरूरी है। फायर ब्रिगेड न केवल आग बुझाने का काम करती है, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में राहत और बचाव कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में छुईखदान जैसे क्षेत्र का इस सुविधा से वंचित रहना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही फायर ब्रिगेड की व्यवस्था नहीं की गई, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा जनहानि का कारण बन सकता है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय पहले ही आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक छुईखदान के लोग इस बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष करते रहेंगे? क्या प्रशासन इस गंभीर समस्या को समय रहते समझेगा या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा?
समय की मांग है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मुद्दे को गंभीरता से लें और छुईखदान में जल्द से जल्द फायर ब्रिगेड केंद्र स्थापित कर लोगों को सुरक्षा का भरोसा दें। क्योंकि सुरक्षा कोई विकल्प नहीं, बल्कि हर नागरिक का अधिकार है।





