
खैरागढ़।
जनपद पंचायत खैरागढ़ में कार्यरत तीन दैनिक वेतनभोगी ऑपरेटरों पर एक ही समय में दो स्थानों से भुगतान लेने का गंभीर मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रकाश यादव, कमलेश वर्मा और प्रमोद चौधरी जहां जनपद पंचायत से नियमित मानदेय प्राप्त कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायतों के ऑनलाइन कार्यों के नाम पर निजी खातों में अतिरिक्त राशि ले रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक इन ऑपरेटरों का नेटवर्क 70 से अधिक ग्राम पंचायतों तक फैला हुआ है। आरोप है कि ये ऑपरेटर ऑनलाइन भुगतान, बिल अपलोड और तकनीकी सेवाओं के नाम पर पंचायतों से हर महीने हजारों रुपये वसूल रहे हैं। कई मामलों में पंचायतों के सरकारी खातों से सीधे इनके निजी खातों में राशि ट्रांसफर किए जाने की बात भी सामने आई है, जिससे संगठित वित्तीय अनियमितता की आशंका गहराती जा रही है। रिकॉर्ड के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में ऑपरेटर प्रमोद चौधरी ने 12 ग्राम पंचायतों से कुल 2,61,760 रुपये अपने निजी खाते में प्राप्त किए। इनमें मदनपुर से 45 हजार, मुतेड़ा से 38 हजार, देवारीभाठ से 19 हजार और बढ़ईटोला से 17 हजार रुपये शामिल हैं। ये भुगतान किन नियमों और स्वीकृतियों के तहत किए गए, यह स्पष्ट नहीं है, जिससे मामला वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। जनपद क्षेत्र की मदनपुर ग्राम पंचायत से जुड़ा मामला विशेष रूप से चर्चा में है, जहां आरोप है कि प्रमोद चौधरी ने एक ही वित्तीय वर्ष में लगभग 45 हजार रुपये सीधे अपने निजी खाते में ट्रांसफर कराए। इस भुगतान की वैधता और स्वीकृति को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यदि अन्य पंचायतों के खातों की गहन जांच की जाए तो बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। प्रकाश यादव पर करीब 20 पंचायतों से लगभग 3 लाख रुपये लेने का आरोप है। वहीं कमलेश वर्मा ने “टिया कम्प्यूटर” नामक फर्म के माध्यम से 19 पंचायतों से करीब 3 लाख रुपये वसूले हैं। इन सभी लेन-देन में पारदर्शिता और वैध प्रक्रिया के पालन को लेकर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। इतनी बड़ी वित्तीय गतिविधियों के बावजूद जनपद और जिला स्तर के अधिकारियों की चुप्पी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि अधिकारियों को इस पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे संभावित मिलीभगत की आशंका को बल मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी कर्मचारी द्वारा बिना सक्षम अनुमति के दो स्रोतों से भुगतान लेना छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों और पंचायत राज अधिनियम का उल्लंघन है। यह न केवल हितों के टकराव का मामला है, बल्कि भ्रष्टाचार की श्रेणी में भी आ सकता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी संबंधित ऑपरेटरों द्वारा पंचायतों से भुगतान लेने का सिलसिला जारी रहने की जानकारी सामने आई है। अलग-अलग पंचायतों से प्रतिमाह हजारों रुपये लेकर कुल मिलाकर लाखों रुपये निजी खातों में प्राप्त किए जा रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि पूर्व में सामने आए मामलों के बावजूद न तो इस पर रोक लगाई गई और न ही कोई प्रभावी कार्रवाई हुई। इस संबंध में जनपद पंचायत खैरागढ़ के सीईओ हिमांशु गुप्ता ने कहा, मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। जानकारी लेने के बाद ही मैं कुछ कह पाऊंगा।





