
सफलता की कहानियाँ: संघर्ष, मेहनत और अटूट विश्वास की मिसालें
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित णमोकार इंस्टीट्यूशन ने पिछले कुछ वर्षों में युवाओं के लिए एक मजबूत प्रेरणा स्रोत बनकर उभरा है। यह संस्थान न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराता है, बल्कि छात्रों के भीतर छिपी क्षमता को जगाता है और उन्हें जीवन की कठिनाइयों से लड़ने की ताकत देता है। समकित छाजेड़ सर और रामटेके सर जैसे मार्गदर्शकों की सख्ती, अनुशासन और प्रेरणादायक शिक्षण शैली ने यहां के छात्रों को छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक, रेलवे पुलिस और अन्य सरकारी नौकरियों में सफलता दिलाई है। आज हम यहां की कुछ चुनिंदा सफलता की कहानियों पर नजर डालते हैं—कामिनी गावड़े, नेहा गौर, तरुण नेताम और गेमन कुमार की। ये कहानियाँ बताती हैं कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत सच्ची हो और परिवार-शिक्षकों का साथ हो, तो कोई भी बाधा अटल नहीं रहती।

1. कामिनी गावड़े: ग्रामीण युवती की दृढ़ इच्छाशक्ति
कुरीतोला चारामा गांव, जिला कांकेर (छत्तीसगढ़) की बेटी कामिनी गावड़े पिता शंभू राम गावड़े और माता सरिता गावड़े की संतान हैं। दो बहनों में बड़ी होने के नाते परिवार की जिम्मेदारियां कम नहीं थीं। पिता-माता कृषि कार्य से गुजारा करते हैं, फिर भी उन्होंने बेटी की पढ़ाई पर पूरा भरोसा रखा। 9 जनवरी 2025 को कामिनी ने णमोकार इंस्टीट्यूशन, धमतरी जॉइन किया और छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक भर्ती की तैयारी शुरू की।
उनकी दिनचर्या अनुशासित थी—सुबह 9 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक कोचिंग, फिर घर पर स्व-अध्ययन। लगातार पढ़ाई से आंखों में दर्द होने लगा, लेकिन वे रात में पूरी नींद लेकर अगले दिन नई ऊर्जा से जुट जातीं। मानसिक दबाव कम नहीं था। घरवाले फोन पर पूछते, “बेटा होगा कि नहीं?” गांव वाले ताने मारते, “लड़की को बाहर रखकर पढ़ा रहे हो, क्या फायदा? शादी कब करोगे?” लेकिन माता-पिता ने कभी इन बातों पर ध्यान नहीं दिया।
संस्थान में रामटेके सर का मार्गदर्शन जीवन बदलने वाला साबित हुआ। कामिनी कहती हैं, “सर जितना सख्त थे, उतना ही जीवन को मजबूत बनाते थे। पढ़ाते-पढ़ाते ताने देते थे, लेकिन वही ताने मेरी प्रेरणा बने। लगा कि अब खुद को साबित करना है।” लगातार मेहनत, सही दिशा और परिवार के विश्वास से कामिनी का छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक में चयन हो गया। उनकी सफलता ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों के लिए एक बड़ा संदेश है—समाज की हर चुनौती को पार किया जा सकता है, अगर इरादा पक्का हो।

नेहा गौर: आंसुओं के बीच अटूट हौसला
नेहा गौर, नगरी जिला धमतरी की निवासी, बचपन से देश सेवा का सपना देखती थीं। पिता गजेंद्र गौर का असमय निधन हो गया, जिससे जीवन कठिन हो गया। लेकिन बड़े पिता ने हर कदम पर सहारा दिया, हौसला बढ़ाया और सपनों को जिंदा रखा। पिता की कमी का दर्द नेहा के मन में रहा, लेकिन वही दर्द उन्हें मजबूत बनाता गया। महीनों तक नेहा ने णमोकार इंस्टीट्यूशन में अनुशासन और समर्पण से तैयारी की। संस्थान से सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास मिला। कठिन परिस्थितियां, मानसिक दबाव और जिम्मेदारियां थीं, लेकिन हार नहीं मानी। पढ़ाई को हथियार बनाया।
सफर यहां रुका नहीं। जिन बड़े पिता ने जीवन की दिशा दी, उनका भी असमय निधन हो गया। नेहा का मन टूट गया, हौसला डगमगाया, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला। परीक्षा देते समय पिता और बड़े पिता की यादें साथ थीं। हर प्रश्न हल करते हुए लगा जैसे वे आशीर्वाद दे रहे हों। परिणाम आने पर आंसू रुक नहीं पाए—यह केवल चयन नहीं, बल्कि पिता और बड़े पिता के अधूरे सपनों का पूरा होना था। आज नेहा छत्तीसगढ़ पुलिस में हैं। उनकी कहानी साबित करती है कि परिस्थितियां कितनी भी विपरीत हों, अपनों की यादें और सच्चा इरादा सपनों को हकीकत बना देता है।

. तरुण नेताम: लगातार मेहनत का फल
लाल बगीचा, धमतरी के निवासी तरुण नेताम, पिता शिव नेताम के बेटे, ने भी णमोकार इंस्टीट्यूशन में कड़ी मेहनत की। यहां की नियमित पढ़ाई, टेस्ट सीरीज और मार्गदर्शन से उन्होंने रेलवे पुलिस में चयन हासिल किया। तरुण की सफलता बताती है कि छोटे शहरों से भी बड़े सपने पूरे हो सकते हैं, बस निरंतर प्रयास जरूरी है।

गेमन कुमार: टेस्ट सीरीज का कमाल
पोटियाडीह, जिला धमतरी के गेमन कुमार, पिता ओंकार प्रसाद के बेटे, व्यापम की छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक भर्ती की तैयारी में लगे। णमोकार इंस्टीट्यूशन के “ऑपरेशन वर्दी टेस्ट सीरीज” ने उनकी कमियां दूर कीं। टेस्ट सीरीज से मिले फीडबैक और सुधार ने उन्हें मजबूत बनाया। परिणामस्वरूप उनका चयन छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक में हुआ। गेमन कहते हैं कि संस्था का मार्गदर्शन और टेस्ट सीरीज मील का पत्थर साबित हुए।

ताम्रध्वज साहू*
पिता गोपी किशन निवासी हटकेशर धमतरी कड़ी मेहनत और लग्न तथा नियमित पढ़ाई से छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक में चयन

टानू सिन्हा पिता फूलचंद सिंह ग्राम अंवरी चारामा ,जिला कांकेर णमोकार इंस्टीट्यूशन से जुड़कर मन का डर निकल गया । लगातार मेहनत और पढ़ाई की जिससे छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक में चयन हुआ।
. *मौसमी साहू* पिता रामाधीन साहू निवासी – ग्राम लोहारसी, जिला धमतरी हमारे संस्थान के स्थापना के साथ ही शुरुआत से हमारे साथ जुड़ी और लगातार एक वर्ष तक कड़ी मेहनत से पढ़ाई करके एसएससी जीडी में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसफ) में चयन
. प्रीति साहू पिता श्री चमनलाल साहू ग्राम लोहरसिंग धमतरी ने 2024 में आयोजित होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा की . मेनका साहू पिता श्री महेशराम साहू ने भी बताया की इस सस्थान में आने से बहुत लाभ हुआ और शिक्षक पात्रता भर्ती 2024 में पात्र पेपर को पास की
ये कहानियाँ सिर्फ व्यक्तिगत सफलताएं नहीं हैं। ये णमोकार इंस्टीट्यूशन की सोच को दर्शाती हैं—गरीबी, पारिवारिक दबाव, समाज की आलोचना या व्यक्तिगत हानि जैसी बाधाओं को पार कर सफलता पाई जा सकती है। रामटेके सर और समकित सर जैसे शिक्षक सख्ती से नहीं, बल्कि प्रेम और विश्वास से छात्रों को तैयार करते हैं। संस्थान 2024 में शुरू हुआ था, लेकिन जल्द ही कई छात्रों का भरोसा जीता और आज SSC, CGTET, CGPSC जैसी परीक्षाओं में भी सफलता दिला रहा है।
ये युवा प्रेरणा स्रोत हैं—खासकर ग्रामीण और कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए। वे बताते हैं कि सरकारी नौकरी सिर्फ अमीरों या शहरियों की नहीं, बल्कि मेहनत करने वाले हर व्यक्ति की हो सकती है। अगर आप भी सपने देख रहे हैं, तो याद रखें: संघर्ष शुरुआत है, मेहनत माध्यम है, और विश्वास अंतिम हथियार। णमोकार इंस्टीट्यूशन जैसी जगहें इसी विश्वास को मजबूत करती हैं।
संस्था के सभी शिक्षक गण समकित छाजेड़ सर, टी रामटेके सर, मेनका साहू मैडम, जगत पाल देवांगन सर की ओर से सभी चयनित छात्रों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं उज्जवल भविष्य हेतु बधाइयां ।
चुनेश साहू 7049466638
9111988965





