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धमतरी में कोटवारी भूमि कथित घोटाला: विधायक के ध्यानाकर्षण के बावजूद प्रशासन की चुप्पी, करोड़ों की सरकारी संपत्ति खतरे में

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चुनेश साहू । धमतरी 

 

 

 छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में कोटवारी सेवा भूमि की अवैध बिक्री और राजस्व अधिकारियों की कथित मिलीभगत का गंभीर घोटाला लगातार सुर्खियां बटोर रहा है। माननीय विधायक ओंकार साहू (क्षेत्र क्रमांक 58) ने 13 दिसंबर 2025 को विधानसभा में नियम 138 (1) के तहत इस मुद्दे पर शासन का ध्यानाकर्षण किया था, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। इससे न केवल शासकीय भूमि नीति का खुला उल्लंघन हो रहा है, बल्कि आम जनता में प्रशासन के प्रति गहरा असंतोष और आक्रोश फैल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति निजी हाथों में चली जाएगी, जिससे ग्रामीण सेवा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।

 

यह मामला उस समय और अधिक गंभीर हो जाता है जब हम राज्य शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी किए गए विभिन्न परिपत्रों और निर्देशों पर नजर डालें। विभाग ने समय-समय पर स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि कोटवारी सेवा भूमि केवल सेवा प्रयोजन के लिए होती है और इसे हस्तांतरित, विक्रय या किसी अन्य रूप में नामांतरण नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए, विभागीय पत्र क्रमांक एफ 10-11/2000/सात-4 (पार्ट), दिनांक 17 जून 2024 में साफतौर पर कहा गया है कि कोटवारों द्वारा विक्रय की गई सेवा भूमि के विरुद्ध समुचित कार्यवाही की जाए। इस पत्र में संदर्भित पूर्व पत्रों—जैसे क्रमांक एफ 10-11/2000/सात/समन्वय, दिनांक 21 अप्रैल 2003; क्रमांक एफ 10-11/2000/न्या.प्र./पार्ट 2, दिनांक 21 दिसंबर 2011; क्रमांक एफ 10-11/2000/आ.प्र./पार्ट 2, दिनांक 10 मार्च 2014; तथा क्रमांक एफ 10-11/2020/सात-4, दिनांक 27 फरवरी 2021—में भी यही प्रावधान दोहराए गए हैं। भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 183 और 185 (7-ख) के अनुसार, सेवा भूमि पर किसी भी संव्यवहार पर सख्त प्रतिबंध है, और अंतरण के लिए कलेक्टर की पूर्व मंजूरी अनिवार्य है। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि अवैध अंतरण के मामलों में भू-अभिलेखों का परिमार्जन किया जाए, सेवा भूमि को ‘अहस्तांतरणीय’ दर्ज किया जाए, नामांतरण आदेश निरस्त किए जाएं, सिविल वाद दायर किए जाएं, और वास्तविक कब्जा पुनः प्राप्त किया जाए। साथ ही, अभिलेखों में ‘अहस्तांतरणीय’ शब्द दर्ज करने का प्रमाण-पत्र शासन को भेजना सुनिश्चित करने को कहा गया है। इन सभी निर्देशों को एक माह की समय-सीमा में पूरा करने का आदेश दिया गया था, लेकिन धमतरी जिले में इनका पालन न के बराबर हुआ है।

 

विधायक ओंकार साहू ने अपने ध्यानाकर्षण पत्र में जिले के विभिन्न ग्रामों में हो रहे इस घोटाले की विस्तृत जानकारी दी थी। उन्होंने प्रेषक के रूप में छत्तीसगढ़ विधानसभा, रायपुर को संबोधित करते हुए कहा कि धमतरी जिले में कोटवारों की सेवा भूमि को राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से टुकड़ों-टुकड़ों में बांटकर अवैध तरीके से बेचा जा रहा है। उदाहरण स्वरूप, ग्राम बिरझुली (तहसील मगरलोड) में खसरा नंबर 160, रकबा 1.27 हेक्टेयर की सेवा भूमि (सर्वेक्षण वर्ष 1996-97 में दर्ज) को 2020 में तत्कालीन पटवारी द्वारा दो भागों में विभाजित कर 0.58 हेक्टेयर पुष्पराज पिता टोमन सिंह (जाति ठेठवार) को बेच दिया गया, जबकि शेष 0.69 हेक्टेयर को सेवा भूमि दिखाया गया। इसी तरह, ग्राम जुगदेही (तहसील भखारा) में खसरा नंबर 746, रकबा 0.65 हेक्टेयर की सेवा भूमि (सर्वेक्षण वर्ष 1994-95 में दर्ज) की दो बार रजिस्ट्री की गई, जिसमें अंतिम रजिस्ट्री 5 जुलाई 2024 को हुई और प्रमाणीकरण 7 अगस्त 2024 को पटवारी , द्वारा नायब तहसीलदार को सूचित किए बिना कर दिया गया। विधायक ने आरोप लगाया कि ऐसे कई मामले संज्ञान में आए हैं, जहां सेवा भूमि को ‘ग्राम नौकर सेवा भूमि/शासकीय सेवा भूमि (अहस्तांतरणीय)’ दर्ज करने के बजाय अवैध बाटकन और विक्रय किया जा रहा है। उन्होंने शासन से चार प्रमुख प्रश्न पूछे: क्या शासन को इसकी जानकारी है? क्या उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी? क्या दोषी कोटवारों, पटवारियों और अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई होगी? और क्या अवैध विक्रय को शून्य घोषित कर भूमि को पुनः सेवा भूमि दर्ज किया जाएगा?

 

दुर्भाग्यवश, विधायक के इस ध्यानाकर्षण के बावजूद जिला मुखिया की ओर से अब तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया। सूत्रों के अनुसार, जिले की दो तहसीलों में जांच चल रही है, लेकिन यह जांच महज कागजी खानापूर्ति साबित हो रही है। वहीं एक तत्कालीन पटवारी पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने ग्राम कोसमर्रा (तहसील भखारा) में खसरा नंबर 900/3 (0.56 हेक्टेयर) की सेवा भूमि को कोटवार मानसिंह के साथ सांठगांठ कर इरफान पिता इकबाल को बेच दिया, इसी तरह, अन्य खसरा नंबरों (900/1 और 900/2) को भूमिस्वामी दर्ज किया गया। प्रशासन की इस निष्क्रियता से राजस्व विभाग की छवि धूमिल हो रही है, और ग्रामीण क्षेत्रों में कोटवार व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सरकारी भूमि की लूट से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, और आम जनता में शासन के प्रति भारी रोष व्याप्त है।

यह घोटाला केवल धमतरी तक सीमित नहीं लगता; राज्य स्तर पर भी इसी तरह के मामले सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शासन के पत्र क्रमांक एफ 10-11/2000/सात-4 (पार्ट) जैसे निर्देशों का सख्ती से पालन नहीं किया गया, तो सेवा भूमि पूरी तरह निजी संपत्ति बन जाएगी। विधायक साहू ने चेतावनी दी कि यह शासकीय संपत्ति, प्रशासनिक पारदर्शिता और ग्रामीण सेवा व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है, लेकिन जिला प्रशासन की चुप्पी से लगता है कि दोषियों को संरक्षण मिल रहा है। क्या अब शासन उच्चस्तरीय जांच का आदेश देगा, या यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा? जनता इंतजार कर रही है, लेकिन प्रशासन की उदासीनता से निराशा बढ़ती जा रही है। 

 

 

चुनेश साहू 9111988965

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