
धमतरी जिले के कुरूद अनुभाग अंतर्गत तहसील कुरूद, भखारा और मगरलोड में राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली में गंभीर अनियमितताओं और लापरवाही के चलते अधिवक्ता संघ ने बड़ा कदम उठाया है। संघ ने 11 नवंबर 2025 से अनिश्चितकालीन रूप से इन तहसीलों के राजस्व न्यायालयीन कार्यवाही का बहिष्कार शुरू कर दिया है। यह फैसला संघ की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया, जिसमें प्रशासन की उदासीनता पर कड़ा रोष व्यक्त किया गया।
अधिवक्ता संघ द्वारा जारी पत्र में खुलासा किया गया है कि इन राजस्व न्यायालयों में वर्षों से व्याप्त अव्यवस्था के बावजूद जिला प्रशासन ने कोई सुधार नहीं किया। संघ ने कई बार अधिकारियों को लिखित शिकायतें सौंपीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। परिणामस्वरूप, अब अधिवक्ता इन न्यायालयों में उपस्थित नहीं होंगे, जिससे हजारों राजस्व मामले ठप हो गए हैं। नामजदगी, बंटवारा, सीमांकन और अन्य भूमि विवादों से जुड़े पक्षकारों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
संघ ने मुख्य शिकायतें इस प्रकार बताई हैं:
प्रतिलिपि शाखा द्वारा अधिवक्ताओं और पक्षकारों को सत्यापित प्रतियां समय पर नहीं दी जातीं, जिससे मामले महीनों लटके रहते हैं।
राजस्व प्रकरणों का पंजीयन समय पर नहीं होता और निर्णय अनिश्चितकाल तक लंबित रहते हैं, जिससे न्याय में देरी हो रही है।
तहसील लिपिकों द्वारा पक्षकारों को गलत जानकारी देकर अनुचित राशि वसूलने के गंभीर आरोप लगे हैं, जो स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार का संकेत है।
नोटिस तामील में जानबूझकर अत्यधिक विलंब किया जाता है, जिससे पक्षकारों का समय और पैसा बर्बाद होता है।
तहसीलों में लंबे समय से एक ही लिपिकों की पदस्थापना है, जिससे वे अपने प्रभाव का दुरुपयोग कर रहे हैं और मनमानी कर रहे हैं।
ये अनियमितताएं न केवल न्याय व्यवस्था को कमजोर कर रही हैं, बल्कि आम जनता, विशेषकर गरीब किसानों और भूमि मालिकों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही हैं। बहिष्कार के कारण अब राजस्व मामलों की सुनवाई पूरी तरह रुक गई है, जिससे नए प्रकरण दर्ज नहीं हो पा रहे और पुराने मामले और लंबित हो गए हैं। इससे भूमि विवाद बढ़ने की आशंका है, साथ ही सरकारी राजस्व संग्रहण पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
अधिवक्ता संघ ने चेतावनी दी है कि जब तक इन समस्याओं का स्थायी निराकरण नहीं होता, बहिष्कार जारी रहेगा। प्रशासन की लापरवाही के कारण यह स्थिति पैदा हुई है, जहां बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई सुधार नहीं किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्व विभाग में पारदर्शिता की कमी और कर्मचारियों की जवाबदेही न होने से ऐसी अनियमितताएं फल-फूल रही हैं। यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन पूरे जिले में फैल सकता है, जिससे न्याय व्यवस्था पर और गहरा संकट आएगा।
वहीं इसके अलावा धमतरी तहसीलों में भी समान्य प्रकरणों में पेशी पर पेशी तामील की जाती है, प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त होने कारण बताकर प्रकरणों को टालने का रिवाज का बन गया है,जिसे लेकर प्रदर्शन का धमतरी में भी अब इसका असर देखने को मिल सकता है
यह घटना छत्तीसगढ़ के राजस्व प्रशासन की कमजोरियों को उजागर करती है, जहां लिपिकीय स्तर पर भ्रष्टाचार और विलंब आम बात हो गई है। आम नागरिकों को उम्मीद है कि जिला कलेक्टर और उच्च अधिकारी हस्तक्षेप करेंगे, अन्यथा न्याय से वंचित लोगों की संख्या बढ़ती जाएगी।
चुनेश साहू 9111988965





