
कोलकाता/नई दिल्ली।
राजनीति की जमीन पर एक बार फिर तापमान बढ़ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक के एक विवादित बयान ने माहौल को गरम कर दिया है। विधायक ने बयान दिया— “हम बाबरी मस्जिद बनाकर रहेंगे, अगर किसी में ताकत है तो रोक कर दिखाए।”
इस कथन के सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक हलचल मच गई है। विपक्षी दलों ने इस बयान को उकसाने वाला, साम्प्रदायिक और भड़काऊ करार दिया है, वहीं TMC पार्टी की ओर से अभी तक इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
विपक्ष का बड़ा हमला , BJP, VHP और अन्य दलों के नेताओं ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि— “यह बयान देश की एकता और कानून व्यवस्था को चुनौती देने जैसा है।” “अदालत के फैसले के बाद इस तरह का बयान संविधान का अपमान है।” कुछ नेताओं ने मांग की है कि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार तत्काल इस बयान पर कार्रवाई करे।
कानूनविदों की राय , संविधान और आपराधिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बयान में उकसाने या हिंसा भड़काने का तत्व साबित होता है, तो संबंधित नेता पर भड़काऊ भाषण, सामाजिक वैमनस्यता फैलाने और शांति भंग करने की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है।
सोशल मीडिया में तूफान , X (पूर्व ट्विटर), फेसबुक और यूट्यूब पर इस बयान को लेकर तगड़ा विवाद चल रहा है। #BabriMasjid, #TMC, #Controversy जैसे हैशटैग घंटे भर में ट्रेंड करने लगे।
एक यूजर ने लिखा— “देश कानून से चलता है, किसी की धमकी से नहीं।” तो वहीं दूसरी ओर कुछ लोग विधायक के समर्थन में भी पोस्ट कर रहे हैं।
राजनीतिक प्रभाव क्या होगा? विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले चुनावों से पहले एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। धर्म, राजनीति और भावनाओं का संगम इसे और तीखा बना रहा है।
आगे क्या? अब राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया, कानूनी कार्रवाई और TMC हाईकमान का रुख तय करेगा कि यह विवाद और कितना आगे जाएगा।





