
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान ने अब निर्णायक मोड़ ले लिया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आने वाले महीनों में नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए “फाइनल ऑपरेशन” शुरू किया जाएगा।
बस्तर और अबूझमाड़ में 2024–2025 के दौरान सुरक्षा बलों ने सबसे बड़ी सफलता दर्ज की है। पिछले डेढ़ साल में नक्सल संगठन की रीढ़ माने जाने वाले कई बड़े चेहरे मारे जा चुके हैं। ढेर हुए टॉप कमांडर नाम जिम्मेदारी स्थिति हिडमा डीकेएसजेड कमिटी चीफ, बस्तर ऑपरेशन लीडर एनकाउंटर में ढेर बसवराजू सेंट्रल कमेटी मेंबर ढेर कोसा दादा अबूझमाड़ क्षेत्र प्रभारी ढेर राजू दादा मिलिट्री विंग हेड ढेर इनकी मौत को नक्सलियों के सबसे बड़े नुकसान के रूप में देखा जा रहा है।
नक्सल ऑपरेशन का आंकड़ा , 600+ नक्सली ढेर हुए , 700+ ने आत्मसमर्पण किया , अब सिर्फ 150 के आसपास सक्रिय अधिकारियों के अनुसार यह संख्या लगातार घट रही है और बचे हुए नक्सली जंगलों में छिपे हैं, जिनकी तलाश तेज की गई है।
IG सुंदरराज की रणनीति बनी ‘गेमचेंजर’ , बस्तर रेंज के IG पी. सुंदरराज की कार्यशैली, इंटेलिजेंस नेटवर्क, लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन और ग्रामीण संपर्क कार्यक्रमों ने इस अभियान को गति दी।
✔ ड्रोन सर्विलांस
✔ जंगल रूट मैपिंग
✔ स्थानीय योद्धा फोर्स (डीआरजी और सीएएफ)
✔ सरेंडर और पुनर्वास नीति
इनसे नक्सल मोर्चे पर राज्य को ऐतिहासिक सफलता मिली है।अमित शाह का बयान “नक्सलवाद भारत की जड़ में घुसा जहर था। अब यह आखिरी चरण में है।
छत्तीसगढ़ को जल्द ही नक्सल मुक्त राज्य घोषित किया जाएगा।” आगे की रणनीति , सूत्रों के अनुसार आने वाले महीनों में: अबूझमाड़ कॉरिडोर पर फुल सर्च ऑपरेशन इंटेल आधारित स्पेशल स्ट्राइक टीम सरेंडर नीति को और मजबूत करने की तैयारी
स्थानीय जनता की राय , बस्तर के ग्रामीणों का कहना है कि पहली बार क्षेत्र में: डर कम हुआ विकास कार्यों की शुरुआत , सड़कें, स्कूल, इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क नजर आने लगे हैं।
निष्कर्ष _10–15 साल तक सबसे खतरनाक नक्सल क्षेत्र माने जाने वाला बस्तर आज बदलाव की राह पर है। अगर मौजूदा रणनीति इसी तरह आगे बढ़ी, तो 2026 तक छत्तीसगढ़ पूरी तरह नक्सल मुक्त हो सकता है।





