
सक्ती जिला
समिति कर्मियों के परिजनों का कलेक्ट्रेट में जोरदार प्रदर्शन
परिजनों ने कहा—“अब और नहीं, हमारे परिवार भूख के कगार पर” जल्द समाधान नहीं तो उग्र होगा आंदोलन
सक्ती।
सहकारी समिति कर्मियों के परिजनों का धैर्य आखिर टूट ही गया। मंगलवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में महिलाएँ, बुजुर्ग और कर्मचारी परिवारजन कलेक्ट्रेट पहुंच गए, जहां उन्होंने जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया। प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट गेट पर घंटों जुटे रहे और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर शासन–प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।
परिजनों ने बताया कि कर्मचारियों का मानदेय महीनों से रोक दिया गया है, जिससे परिवारों की आर्थिक स्थिति बद से बदतर हो गई है। अनियमित भुगतान और वेतन कटौती के कारण घर चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। कई महिलाओं ने भावुक होते हुए कहा कि बच्चों की पढ़ाई रुकने की कगार पर है, घर का राशन खत्म हो रहा है और दवाई के पैसे तक नहीं बचे हैं।
एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा—“हमारे पति 15 दिनों से हड़ताल पर बैठे हैं। घर में एक रुपये की भी आमदनी नहीं हो रही। ऊपर से प्रशासन एस्मा लगाकर दबाव बना रहा है। आखिर हम जाएं तो जाएं कहाँ?”
गौरतलब है कि जिले में कंप्यूटर ऑपरेटर और धान खरीदी प्रभारी पिछले पंद्रह दिनों से अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। हड़ताल के चलते कई केंद्रों में धान खरीदी का काम ठप है, जिससे न केवल कर्मचारी वर्ग बल्कि किसान भी परेशान हैं। किसानों की लम्बी कतारें धान खरीदी केंद्रों में देखने को मिल रही हैं, पर काम रुकने से उनकी फसल तुलाई नहीं हो पा रही।
इस स्थिति को संभालने की जगह प्रशासन ने एस्मा लगाकर हड़ताल कर रहे कर्मचारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है, जिस पर परिजनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि समस्याओं का समाधान संवाद से निकलना चाहिए, न कि दमनकारी कदमों से।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आने वाले दिनों में मानदेय जारी नहीं किया गया और हड़तालरत कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। परिजनों ने कहा कि वे कलेक्ट्रेट घेराव, सड़क जाम और बड़े स्तर के धरना–प्रदर्शन जैसी कार्यवाहियों के लिए भी तैयार हैं।
कलेक्ट्रेट परिसर में भारी भीड़ जमा होने से सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ानी पड़ी। अधिकारी प्रदर्शनकारियों को शांत कराने की कोशिश करते रहे, लेकिन परिजन अपनी मांगों पर अडिग रहे।
कुल मिलाकर, सक्ती जिले में सहकारी समिति कर्मियों का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है और यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर आने वाले दिनों में धान खरीदी व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज पर और अधिक दिखाई देगा।





