
सक्ती जिले के हसौद थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ग्राम मल्दा निवासी रामसागर मित्तल ने हसौद पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसके भाई महेंद्र मित्तल को पुलिस ने अवैध शराब परिवहन के झूठे मामले में फंसा दिया है। इस संबंध में शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक सक्ती एवं आईजी बिलासपुर रेंज को लिखित आवेदन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।रामसागर मित्तल के अनुसार, पुलिस ने 70 लीटर महुआ शराब दिखाकर उसके भाई पर झूठा केस दर्ज किया। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि हसौद पुलिस के आरक्षक नंदु साहू और अरविन्द जायसवाल ने एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी, और जब पैसे नहीं दिए गए, तो पुलिस ने मनगढ़ंत तरीके से अवैध शराब का मामला दर्ज कर लिया।
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में लिखा है कि पुलिस ने ढाबे से बोरा और पानी की बोतल उठाकर सबूत के तौर पर पेश किया और उसी के आधार पर महेंद्र मित्तल पर केस बना दिया। यह साजिशपूर्वक रचा गया मामला है, ताकि पुलिसकर्मियों की अवैध उगाही को छिपाया जा सके।
रामसागर मित्तल ने बताया कि उसने इस पूरे घटनाक्रम के सबूत के रूप में सीसीटीवी फुटेज और ऑडियो रिकॉर्डिंग पुलिस अधिकारियों को उपलब्ध कराई है, जिसमें स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि पुलिस की कार्रवाई संदिग्ध थी। उन्होंने कहा कि अगर निष्पक्ष जांच की जाए, तो पूरा मामला साफ हो जाएगा और उनके भाई की बेगुनाही साबित होगी।
मित्तल परिवार ने कहा कि उन्हें अब न्यायपालिका और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर भरोसा है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ ऐसी अन्यायपूर्ण घटना न हो।इस पूरे मामले पर पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सूत्रों के अनुसार, एसपी सक्ती ने मामले की जानकारी लेकर जांच टीम गठित करने के संकेत दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह पुलिस विभाग की साख पर बड़ा सवाल होगा। वहीं, गांव के कुछ लोगों ने भी बताया कि महेंद्र मित्तल शराब व्यापार से कोई संबंध नहीं रखते और वे ईमानदार परिवार के सदस्य हैं।अब देखने वाली बात यह होगी कि उच्च अधिकारी इस मामले की जांच कितनी पारदर्शिता से करते हैं और क्या वास्तव में निर्दोष व्यक्ति को न्याय मिल पाता है या नहीं।





