hindmedianews
Breaking News
छत्तीसगढ़ब्रेकिंग न्यूज़

बिलासपुर वनमंडल के बेलगहना वनपरिक्षेत्र अंतर्गत खोंगसरा में हिरण की संदिग्ध मौत, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल”….!

IMG-20250714-WA0596
previous arrow
next arrow

बेलगहना/कोटा:-बिलासपुर वनमंडल के अंतर्गत बेलगहना वनपरिक्षेत्र के खोंगसरा में एक हिरण की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे वन विभाग की नींद उड़ा दी है। घटना न सिर्फ वन्यजीव संरक्षण की पोल खोलती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि वन विभाग की लापरवाही जानलेवा बन चुकी है।

मृत हिरण का शव मौके पर ही पड़ा रहा, परंतु घंटों बीत जाने के बाद भी पोस्टमार्टम नहीं हो सका, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया है। बताया गया कि क्षेत्रीय पशु चिकित्सक घटना के घंटों बाद भी नहीं पहुंचे, वहीं बेलगहना रेंजर देव सिंह मरावी को उनके फोन नंबर 075874 38225 पर कॉल करने पर उनके द्वारा कॉल रिसीव नहीं हुआ, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों ने आशंका जाहिर की है कि यह मामला शिकार का हो सकता है और यदि ऐसा है तो दोषियों को तत्काल पकड़कर कड़ी सजा दी जानी चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में शिकारियों की गतिविधियाँ लगातार बढ़ती जा रही हैं, लेकिन वन विभाग चुप्पी साधे बैठा है।

घटना की सूचना मिलते ही डिप्टी रेंजर नरेंद्र सिंह बेसवाडे मौके पर पहुँचे और जाँच की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन पशु चिकित्सक की अनुपस्थिति के कारण पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी, जिससे पूरे मामले की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

क्या वन विभाग मूकदर्शक बना रहेगा?
क्या इस मौत की निष्पक्ष जांच होगी या फाइलों में दबा दी जाएगी?
क्या शिकारियों और अधिकारियों की मिलीभगत की परतें खुलेंगी?

यह सिर्फ एक हिरण की मौत नहीं, बल्कि वन्यजीवों के संरक्षण तंत्र की मौत है।
अब जवाब देना होगा – वन विभाग को, शासन को और प्रशासन को।

वन विभाग की निष्क्रियता के पीछे छिपे हैं बड़े सवाल…

वनमंडल बिलासपुर का बेलगहना परिक्षेत्र सुर्खियाँ बटोरने में तो माहिर है, पर जमीनी हकीकत में सक्रियता का अभाव साफ नजर आता है।
खोंगसरा सर्किल में हिरण की मौत से वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी कठघरे में खड़े हो गए हैं। आखिर जिम्मेदार कौन?

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अनुसार:-किसी भी मृत हिरण की जांच पशु चिकित्सक द्वारा की जानी चाहिए।यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि मौत का कारण प्राकृतिक, दुर्घटनावश, या चोट/शिकार है।रिपोर्ट पर पशु चिकित्सक के हस्ताक्षर और मुहर अनिवार्य होते हैं।मृत वन्यजीव के सींग, खाल, दांत आदि की सूची बनाकर उसे स्टॉक रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। पोस्टमार्टम के समय की तस्वीरें, घटनास्थल का पंचनामा, स्थानीय गवाहों के बयान और अन्य आवश्यक रिकॉर्ड भी संलग्न किए जाते हैं।
यदि ग्रामीणों या अन्य व्यक्तियों को संदेह हो कि शव को उचित प्रक्रिया से नहीं दफनाया गया या रिपोर्ट को दबाया जा रहा है, तो वन विभाग के उच्च अधिकारियों को RTI के माध्यम से जानकारी मांगी जा सकती है।

इस प्रकार इस मामले में नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही ने वन्यजीव संरक्षण की साख को गहरा आघात पहुँचाया है।

संबंधित पोस्ट

मेरी मां कर्मा” धार्मिक फिल्म का प्रचार प्रसार धमतरी में या। 5 अप्रैल को रिलीज हो रही “मेरी मां कर्मा” धार्मिक हिंदी फिल्म डी. एन.साहू 

Chunesh Sahu

Chunesh Sahu

समय-सीमा में लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करें-कलेक्टर श्री शर्मा

hindmedianews

श्री सिद्धेश्वर शिव महापुराण कथा में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री साय कथा प्रवक्ता श्री ब्रजनंदन जी महराज से लिया आशीर्वाद* *प्रदेश की सुख, समृद्धि एवं खुशहाली के लिए कामना की

Chunesh Sahu

जिले के सातों नगरीय निकाय के निर्वाचित प्रत्याशियों को निर्वाचन प्रमाण पत्र प्रदान किया

Sakshi Bansod

Chunesh Sahu