
लोक कलाकार जितेंद्र साहू ने अपने परिवार के साथ खाया बोरे बासी और अपने अंदाज में कहा… अब्बड़ सुहाथे भइया हमर छत्तीसगढ़ के बासी
रोज रोज खावो बासी..
नई रहे मन उदासी…
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बालोद. गुरूर… लोक मंच सोनहा बादर ग्राम चिटौद जिला बालोद के संचालक/संगीतकार जितेन्द्र साहू ल छत्तीसगढ़ के संस्कृति परम्परा अउ जम्मो छत्तीसगड़िया जिनिस ले अब्बड़ मया हे, हमर छत्तीसगढ़ के बासी म गजब के मिठास अउ बिटामिन समाए हे, हमर छत्तीसगढ़ परम्परा संस्कृति के बोली भाखा, पहनावा ओड़ावा,खान पान, गीत संगीत, रहन सहन, तीज तिहार, आदि के अलगेच बानगी हे, जितेन्द्र साहू कथे कि वो वोकर परिवार अउ वोकर साथ जुड़े जम्मो संगीत परिवार मन बासी के साथ साथ चीला खप्पुर्री फरा सोंहारी पेज पसिया अड़बड़ चाव के सँग खाते रथन, जितेन्द्र साहू के जम्मो छत्तीसगढ़ के मनखे ले अपील हे कि वो बासी के संगे संगे जम्मो छत्तीसगढ़ीया जिनिस ल अपन अपन दिनचर्या मे जरूर अपनाए, संगे संगे कलाकार जितेन्द्र साहू इहि कहना चाहत हे कि —– *बासी छत्तीसगढ़ के चिंहारी आय*
*फेर ये सिरतोन मे नदावत हे* ||
*छत्तीसगढ़ के मनखे मन अपने जिनिस ल भुलागेहे*,
*बासी खवईया मन उहि ल सुरता देवावत हे* ||
*वइसे हम तो बीच बीच मे बासी ल खाते रथन* ||
*अपन गीत गोबिंद मे बासी चटनी अउ*,
*चीला खप्पुर्री के गुन गाते रथन* ||
*कहूं ये परदेसिया मन हमर बासी ल झन कहीदे अपन धरोहर* ||
*वोकरे सेती बासी ल दिनचरया मे अपना लेव घरोघर* ||
*जय जय छत्तीसगढ़*





