

भिलाई। “मो. शाहिद और जुल्फिकार सिद्धिक्की के खिलाफ शिकायकर्ता के पास ऐसा कोई दस्तावेज और रिकॉर्ड नहीं है जो ये साबित करें कि नौकरी के नाम पर पैसे का लेन-देन को दर्शाता हो। इसलिए अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाता है।” ये कमेंट बिलासपुर हाईकोर्ट के जस्टिस प्रीतम साहू का है। जस्टिस प्रीतम अग्रिम जमानत को लेकर सुनवाई कर रहे थे।







