
घर-घर रोजगार, हाथ-हाथ हुनरः नगरी का रेशम क्लस्टर बनेगा मिसाल
महिलाओं के हाथों में आई आत्मनिर्भरता की डोरः
चुनेश साहू । धमतरी,
धमतरी जिले के नगरी विकासखंड में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा एक अभिनव पहल की जा रही है। प्रस्तावित तसर रेशम क्लस्टर अब केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी समुदायों के लिए स्थायी आजीविका का भरोसेमंद माध्यम बनकर उभर रहा है। केंद्र सरकार को भेजा गया यह प्रस्ताव अंतिम अनुमोदन की प्रक्रिया में है, जिसके बाद नगरी क्षेत्र रेशम उत्पादन की एक नई पहचान बनाएगा।
महिलाओं के हाथों में आई आत्मनिर्भरता की डोरः इस पहल का सबसे सशक्त पहलू है महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण। प्रारंभिक चरण में 20 महिलाओं को तसर कोसा धागाकरण हेतु बुनियाद रीलिंग एवं विद्युत चालित स्पिनिंग मशीनों का प्रशिक्षण दिया गया है। अगले चरण में चार अन्य ग्रामों की 20 महिलाओं को भी इससे जोड़ा जाएगा। आज ये महिलाएं कोसा से धागा बनाकर अपने हुनर से आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं।
घर बैठे रोज़गार, रोज़ बढ़ती आमदनीः खोज संस्थान की प्रतिनिधि सावित्री यादव बताती हैं कि प्रशिक्षित महिलाएं अब अपने घरों में ही तसर धागा उत्पादन कर रही हैं, जिससे उन्हें प्रतिदिन ₹200 से ₹250 तक की अतिरिक्त आय हो रही है। स्थानीय महिला भुनेश्वरी के अनुसार कोसा को सोडा-साबुन मिश्रण में उबालकर मशीनों से महीन धागा बनाया जाता है, जिसकी बाजार में अच्छी मांग है। यह कार्य कम संसाधनों में सम्मानजनक आय दे रहा है।
किसानों के लिए आय का नया विकल्पः रेशम क्लस्टर का लाभ केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है। इच्छुक किसान अपने खेतों में शहतूत के पौधे लगाकर कोसा पालन कर सकेंगे। इससे कृषि आय में विविधता आएगी और जोखिम भी घटेगा। प्रारंभिक रूप से 40 किसानों ने इस योजना से जुड़ने की सहमति दी है। प्रशासन द्वारा उन्हें आधुनिक रेशम उत्पादन तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

प्रशासन की सोच, आत्मनिर्भर गांव :कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि “रेशम उद्योग ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम है। तसर उत्पादन में अल्प निवेश से अधिक लाभ संभव है। यह महिलाओं और बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार का प्रभावी साधन बनेगा। हमारा लक्ष्य है कि हर ग्रामीण महिला अपने कौशल से आर्थिक रूप से सशक्त बने।”
आत्मनिर्भर धमतरी की ओर ठोस कदमः
धमतरी जिला प्रशासन की यह पहल प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग, विपणन व्यवस्था और बाजार से सीधा जुड़ाव सुनिश्चित करेगी। रेशम क्लस्टर के माध्यम से महिलाओं, किसानों और युवाओं को दीर्घकालिक एवं सम्मानजनक आजीविका मिलेगी। यह प्रयास न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि “आत्मनिर्भर धमतरी” के संकल्प को जमीन पर साकार करेगा।
नगरी में रेशम की यह पहल साबित कर रही है कि सही नीति, प्रशिक्षण और विश्वास के साथ ग्रामीण विकास की कहानी नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती है।
धमतरी जिले में समर्थन मूल्य पर 55,735 किसानों से अब तक 2 लाख 66 हज़ार मे.टन धान की खरीदी
52,560 किसानों को 594.19 करोड़ रुपये का भुगतान सीधे बैंक खातों में
चुनेश साहू । धमतरी,
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धमतरी जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया सुव्यवस्थित, पारदर्शी एवं किसान हितैषी रूप से संचालित की जा रही है। जिले की 74 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों एवं आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों के अंतर्गत कुल 100 धान उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से अब तक पंजीकृत 1,29,380 किसानों में से 55,735 किसानों से 2,66,155 मे.टन धान की खरीदी की जा चुकी है।
अब तक खरीदी गई धान का कुल मूल्य 631.18 करोड़ रुपये है, जिसमें से 52,560 किसानों को 594.19 करोड़ रुपये का भुगतान सीधे बैंक खातों में किया जा चुका है। शेष किसानों को भी नियमानुसार निरंतर भुगतान किया जा रहा है, जिससे किसानों में संतोष एवं विश्वास का वातावरण बना हुआ है।
कल दिनांक 23 दिसंबर 2025 को होने वाली धान खरीदी के लिए 3,207 किसानों को 14,298.04 क्विंटल धान विक्रय हेतु टोकन जारी किए गए हैं, जिससे खरीदी प्रक्रिया सुचारू और व्यवस्थित बनी रहे।
जिले में उपार्जित धान के शीघ्र निराकरण हेतु कस्टम मिलिंग व्यवस्था के अंतर्गत अब तक 159 राइस मिलों का पंजीयन किया गया है। पंजीकृत राइस मिलरों द्वारा अनुबंध के पश्चात 89,856.40 मे.टन धान उठाव के लिए डिलीवरी ऑर्डर (डी.ओ.) जारी किए गए हैं, जिसके विरुद्ध 43,258.80 मे.टन धान का उठाव किया जा चुका है। वर्तमान में उपार्जन केन्द्रों में 2,22,896.20 मे.टन धान उठाव हेतु शेष है, जिसका निराकरण प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है।
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान कोचियों एवं बिचौलियों द्वारा अवैध भंडारण अथवा परिवहन की संभावनाओं को रोकने हेतु जिला प्रशासन द्वारा सख़्त निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। प्रत्येक विकासखंड में राजस्व, कृषि, खाद्य, सहकारिता एवं कृषि उपज मंडी विभाग के अधिकारियों को शामिल करते हुए ब्लॉक एवं जिला स्तरीय उड़नदस्ता दलों का गठन किया गया है।
इन उड़नदस्ता दलों द्वारा दिनांक 22 दिसंबर 2025 तक मंडी अधिनियम 1972 के तहत लगातार कार्यवाही करते हुए 112 प्रकरण दर्ज किए गए हैं तथा 4,619.5 क्विंटल अवैध धान जप्त किया गया है। यह कार्यवाही शासन की जीरो टॉलरेंस नीति और किसानों के हितों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
जिला प्रशासन के सतत् प्रयासों से धमतरी जिले में धान खरीदी, भुगतान एवं परिवहन की संपूर्ण व्यवस्था पारदर्शी, सुरक्षित और किसान हित में संचालित हो रही है, जिससे जिले के अन्नदाताओं को आर्थिक संबल के साथ-साथ शासन पर भरोसा भी मजबूत हो रहा है।

03.
धमतरी में फूलों की खेती को मिलेगा नया आयाम, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की कार्यशाला आयोजित
फूलों की खेती में अपार संभावनाएं, सरकार दे रही सब्सिडी और प्रशिक्षणः कलेक्टर
फूलों की खेती को बढ़ावा देने प्रशासन सक्रिय, किसानों की सुविधा हेतु ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया
के लिए मिलेगी सुविधा
संरक्षित खेती की तकनीक, लागत, अनुदान संरचना एवं वित्तीय सहायता प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी
चुनेश साहू । धमतरी,
जिले में किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा की अध्यक्षता में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य जिले में फूलों की संरक्षित खेती को प्रोत्साहित करना तथा किसानों को आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ना रहा। इसमें जिले के बड़ी संख्या में प्रगतिशील एवं इच्छुक किसान शामिल हुए।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए कलेक्टर मिश्रा ने कहा कि धमतरी जिले की जलवायु एवं भौगोलिक परिस्थितियाँ गुलाब, जरबेरा, ऑर्किड, लिली जैसे उच्च मूल्य वाले फूलों की संरक्षित खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं। उन्होंने कहा कि बदलते समय में पारंपरिक खेती के साथ-साथ संरक्षित खेती किसानों के लिए स्थायी आय का मजबूत माध्यम बन सकती है। जिले के कई किसान पहले ही इस दिशा में सफल उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।
कलेक्टर ने बताया कि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड एवं शासन की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत पॉलीहाउस, शेडनेट, ड्रिप सिंचाई सहित संरक्षित खेती के लिए आकर्षक सब्सिडी, बैंक ऋण तथा तकनीकी प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाकर ऑनलाइन आवेदन करें। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऑनलाइन आवेदन एवं बैंक ऋण से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष सहायता शिविर आयोजित किए जाएं, ताकि किसानों को समयबद्ध लाभ मिल सके।
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की उप संचालक गरपति श्रीनिजा ने संरक्षित खेती की तकनीकी बारीकियों, लागत अनुमान, अनुदान संरचना एवं वित्तीय सहायता की प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फूलों की खेती के साथ-साथ टमाटर, शिमला मिर्च, ककड़ी जैसी सब्जियों की संरक्षित खेती पर भी अनुदान का प्रावधान है, जिससे किसानों के लिए आय के विविध अवसर खुलते हैं।
कार्यशाला में अग्रणी जिला प्रबंधक द्वारा बैंकिंग एवं ऋण प्रक्रिया की सरल जानकारी साझा की गई। वहीं राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजनाओं से लाभान्वित उन्नतशील कृषकों ने अपने अनुभव साझा कर अन्य किसानों को प्रेरित किया, जिससे कार्यक्रम में आत्मविश्वास और उत्साह का माहौल बना।
इस अवसर पर कृषि एवं उद्यान विभाग द्वारा संचालित विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं की जानकारी भी दी गई, जिनमें राज्य पोषित विकास योजना, मसाला विस्तार योजना, आलू फसल प्रदर्शन, मधुमक्खी पालन, बागवानी मिशन, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल पाम, मौसम आधारित फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, राष्ट्रीय बांस मिशन सहित अन्य योजनाएं शामिल हैं।
कार्यशाला में उप संचालक कृषि मोनेश साहू, उप संचालक उद्यान पूजा कश्यप साहू सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यशाला के समापन पर किसानों में फूलों की संरक्षित खेती को लेकर उत्साह, जागरूकता एवं सकारात्मक सोच स्पष्ट रूप से देखने को मिली।
चुनेश साहू 9111988965





