
CG SIR Process का बढ़ा दायरा: 2003 के रिकार्ड खंगालने बाहरी राज्यों तक पहुंची जांच
जगदलपुर।
छत्तीसगढ़ में चल रही SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 2003 के पुराने टेक्सटबुक और दस्तावेज़ी रिकार्ड न मिलने के कारण प्रशासन अब बाहरी राज्यों तक जांच का दायरा बढ़ा रहा है। इसका सीधा प्रभाव उन महिलाओं पर पड़ रहा है जो 20–22 वर्ष पहले शादी कर बस्तर आई थीं और अब इस प्रक्रिया में उनसे माता-पिता की पहचान और जन्म संबंधी प्रमाण माँगे जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में 2003 के रिकार्ड स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में जांच अधिकारी उन बहुओं से उनके मायके से प्रमाण जुटाने को कह रहे हैं, जिनके परिवारों का अब पुराना रिकार्ड मिलना लगभग असंभव है। कुछ विवाह तो ऐसे हैं जो उस दौर में हुए जब दस्तावेज़ीकरण ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत सीमित था।
“2003 के दस्तावेज़ कहाँ से लाएँ?”
प्रभावित महिलाओं का कहना है कि अचानक से 22 साल पुराने रिकार्ड ढूँढना न सिर्फ मुश्किल है बल्कि कई मायनों में असंभव है। कई महिलाएँ तो अब अपने मायके के गाँवों से भी दूर हो चुकी हैं।
एक गृहणी ने बताया— “हम शादी के बाद बस्तर आए। अब दो दशक बाद मायके का रिकार्ड माँगा जा रहा है। न पिता हैं, न पुराने कागज। हम कहाँ जाएँ?”
गाँवों में बढ़ी चिंता, पंचायतों में लगी कतारें
नई प्रक्रिया के चलते पंचायत कार्यालयों में प्रमाणपत्र बनवाने भीड़ बढ़ गई है। कई घरों में महिलाएँ लगातार चक्कर काट रही हैं। कुछ परिवारों ने बताया कि उन्हें अपने मायके के राज्यों—आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना तक संपर्क करना पड़ रहा है, परंतु पुराने रिकार्ड हाथ नहीं लग पा रहे।
प्रशासन का पक्ष
जांच अधिकारियों का कहना है कि SIR प्रक्रिया निर्वाचन सूची को शुद्ध करने की कानूनी बाध्यता है। पुराने रिकार्ड की मांग निर्देशों के तहत की जा रही है, लेकिन “जहाँ असमर्थता प्रमाणित होगी, वहाँ प्रक्रिया में नरमी पर विचार किया जा सकता है।”
जनप्रतिनिधियों ने उठाए सवाल
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कहा कि बस्तर में बाहरी राज्यों से विवाह कर आने वाली महिलाओं की संख्या अधिक है। ऐसे में 20–25 वर्ष पुराने दस्तावेज़ माँगना अव्यावहारिक है और इससे आम घरों में अनावश्यक तनाव बढ़ रहा है। प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की गई है।
निष्कर्ष
SIR प्रक्रिया का उद्देश्य भले ही निर्वाचन सूची को मजबूत करना हो, लेकिन पुराने रिकार्ड की अनिवार्यता से घर की बहुएँ हालाकान हैं। बाहरी राज्यों तक जांच पहुँचने के बाद अब इस मुद्दे ने प्रशासन और जनता दोनों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है।





