
रायपुर। प्रदेश में शिक्षा विभाग की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया प्राचार्य पदोन्नति (Principal Promotion) की काउंसलिंग आज से शुरू हो रही है। मगर काउंसलिंग के ठीक पहले आई संशोधित सूची ने पूरे शिक्षकीय जगत में खलबली मचा दी है। आरोप लग रहे हैं कि सूची में जानबूझकर फेरबदल कर कुछ अधिकारियों और “अपनों” को लाभ पहुंचाया गया है।
फाइनल सूची के बाद अचानक बदलाव क्यों?
सूत्रों के मुताबिक विभाग ने पहले फाइनल सूची जारी कर दी थी, जिसके आधार पर आज से काउंसलिंग होना तय था। लेकिन देर रात बिना किसी स्पष्ट कारण के नई सूची सामने आ गई। इससे कई सवाल उठ खड़े हुए हैं—
क्या फाइनल सूची में बदलाव पर निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई गई? संशोधित सूची में किन-किन नामों को जोड़ा या हटाया गया? क्या प्रमोशन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है? क्या कुछ पदों पर “पसंदीदा” उम्मीदवारों के लिए रास्ता साफ किया गया?
शिक्षक संगठन नाराज़, पारदर्शिता की मांग
कई शिक्षक संगठनों ने शिकायत की है कि सूची में बदलाव से वरिष्ठता और अनुभव जैसे मानदंडों को कमजोर किया गया है। संगठनों ने आरोप लगाया कि— “फाइनल सूची जारी होने के बाद इसे बदलना संदेह पैदा करता है। विभाग को स्पष्ट जवाब देना होगा कि क्या बदलाव हुए और क्यों हुए?”
विभाग की सफाई — तकनीकी त्रुटियों का दिया हवाला
वहीं शिक्षा विभाग का कहना है कि सूची में संशोधन तकनीकी कारणों और रिकॉर्ड अपडेशन के चलते किया गया है। अधिकारियों ने दावा किया कि “किसी भी उम्मीदवार के साथ अन्याय नहीं होगा” और प्रमोशन की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी।
काउंसलिंग पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका
काउंसलिंग प्रक्रिया के बीच सूची में फेरबदल की खबर से कई शिक्षक असमंजस में हैं। कुछ को डर है कि अंतिम समय में बदलाव से उनकी प्रमोशन रैंकिंग प्रभावित होगी। वहीं कई उम्मीदवारों का कहना है कि यदि सूची विवादित है तो काउंसलिंग डेट आगे बढ़नी चाहिए
आगे क्या?
सूची के विवाद पर शिक्षक संगठनों ने विभाग से स्पष्ट स्पष्टीकरण मांगने के साथ ही जांच की भी मांग की है। इधर, काउंसलिंग आज निर्धारित समय पर शुरू हो रही है, लेकिन इस विवाद का असर पूरे प्रमोशन प्रकरण पर पड़ना तय माना जा रहा है।





