
छत्तीसगढ़ एटीएस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए रायपुर और भिलाई से आतंकी संगठन आईएसआईएस से जुड़े होने के संदेह में दो नाबालिगों को हिरासत में लिया है। दोनों की गतिविधियों पर पिछले कई दिनों से निगरानी की जा रही थी। गिरफ्तारी के बाद प्रारंभिक जांच में ऐसे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
अरबी भाषा सीख रहे थे, मिले आपत्तिजनक चैट
एटीएस सूत्रों के अनुसार, दोनों नाबालिग लगातार इंटरनेट के माध्यम से अरबी भाषा सीख रहे थे और विदेशी हैंडलर्स से संपर्क करने की कोशिश में थे। उनके मोबाइल फोन और सोशल मीडिया अकाउंट से आपत्तिजनक चैट, संदिग्ध आइडियोलॉजिकल कंटेंट और आईएसआईएस से जुड़े डिजिटल मैटेरियल बरामद किए गए हैं।
जांच टीम का कहना है कि चैट्स में कट्टरपंथी सामग्री, गाइडलाइन जैसी बातचीत और विदेशी लिंक के संकेत मिले हैं। फिलहाल इन चैट्स की साइबर फोरेंसिक जांच जारी है।
राज्य में बड़े नेटवर्क की तलाश, कई जगह छापेमारी
एटीएस ने दोनों नाबालिगों की गिरफ्तारी के बाद तुरंत शहर के अलग-अलग इलाकों में सर्च ऑपरेशन और छापेमारी शुरू की है। एजेंसियों को संदेह है कि प्रदेश में बैठे कुछ और लोग युवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए प्रभावित कर रहे हैं।
जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि दोनों नाबालिगों का आईएसआईएस से सीधे कोई संपर्क था या उन्हें किसी स्थानीय नेटवर्क से प्रभावित किया गया था।
परिवार से पूछताछ, डिजिटल फुटप्रिंट खंगाल रही एटीएस
नाबालिग होने के कारण एजेंसियां मामले को बेहद संवेदनशील तरीके से आगे बढ़ा रही हैं। दोनों के परिवारजनों से भी पूछताछ की जा रही है।
एटीएस की टीम उनके लैपटॉप, मोबाइल, ऑनलाइन एक्टिविटी, वीडियो कॉल्स, चैट रूम्स और फॉलो किए गए अकाउंट्स की बारीकी से जांच कर रही है।
छत्तीसगढ़ एटीएस की बड़ी कार्रवाई, केंद्रीय एजेंसियां भी अलर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय एजेंसियों को भी इसकी जानकारी दे दी गई है। राज्य में साइबर कट्टरपंथ से जुड़े मामलों पर पहले भी निगरानी रखी जाती रही है, लेकिन दो नाबालिगों का इस प्रकार सक्रिय रूप से इस दिशा में बढ़ना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चेतावनी संकेत माना जा रहा है।
एटीएस ने किया सतर्क, माता–पिता को दी सलाह
एजेंसियों ने प्रदेश के माता–पिता और अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों, चैट्स और सोशल मीडिया उपयोग पर नजर रखें, क्योंकि आतंकी संगठन अक्सर नाबालिगों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए प्रभावित करने की कोशिश करते हैं।
फिलहाल दोनों नाबालिग एटीएस हिरासत में हैं और मामला किशोर न्याय अधिनियम के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है।
जांच पूरी होने तक यह खुलासा नहीं किया गया है कि उनकी गतिविधियां प्रारंभिक स्तर पर थीं या किसी बड़े प्लान की तैयारी की जा रही थी।





