
धमतरी, 4 नवंबर 2025:
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में प्रशासनिक सुस्ती और भ्रष्टाचार का काला चेहरा एक बार फिर उजागर हो गया है। सोमवार को कलेक्ट्रेट में जनदर्शन के दौरान एक युवक ने अपने शरीर पर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया, जो जमीन विवाद की अनसुलझी शिकायतों से तंग आ चुका था। यह घटना न केवल कलेक्ट्रेट में हड़कंप मचा गई, बल्कि आम जनता के बीच प्रशासन के प्रति अविश्वास की आग को और भड़का दिया। उधर, एक अन्य पीड़ित ने पटवारी की रिश्वतखोरी की शिकायत दर्ज कराई है, जो बताती है कि कैसे निचले स्तर पर भ्रष्टाचार ग्रामीणों की जिंदगी को नर्क बना रहा है। ये दोनों मामले मिलकर साबित करते हैं कि धमतरी प्रशासन फरियादों को दबाने और भ्रष्टाचार को पनपने देने में लगा हुआ है, जहां गरीब किसान और मजदूर न तो न्याय पा रहे हैं और न ही जीविका चला पा रहे हैं।

घटना के चश्मदीदों के अनुसार, भखारा क्षेत्र के रामपुर निवासी युवक दोपहर करीब 1 बजे जनदर्शन स्थल पर पहुंचा। उसके हाथ में शिकायत पत्र था, जिसमें वह अपनी जमीन संबंधी समस्या का जिक्र कर रहा था। “मैंने कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब जीने का कोई सहारा नहीं बचा,” चिल्लाते हुए उसने पेट्रोल की बोतल निकाली और खुद पर उंडेल दिया। सौभाग्य से, मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने फुर्ती दिखाई और उसे पकड़ लिया, वरना एक और निर्दोष जिंदगी प्रशासन की उदासीनता का शिकार हो जाती। युवक का आरोप है कि उसकी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायतें वर्षों से लंबित हैं, और अधिकारी केवल आश्वासनों तक सीमित हैं। यह घटना कलेक्ट्रेट में अफरा-तफरी मचा गई, लेकिन क्या इससे कोई सबक लिया जाएगा? इतिहास गवाह है कि ऐसी घटनाएं बार-बार दोहराई जाती हैं, फिर भी सुधार की कोई कोशिश नहीं।

इसी बीच, ग्राम घोटगांव के निवासी मुकेश कुमार मरकाम ने कलेक्टर को एक मार्मिक शिकायत पत्र लिखा है, जो पटवारी भागवत प्रसाद कौशिक की रिश्वतखोरी को बेनकाब करता है। मुकेश के पिता स्व. भगवान सिंह मरकाम की 14 अगस्त 2025 को मृत्यु हो गई, और उनके नाम पर 2.71 हेक्टेयर जमीन है। चाचा भवन सिंह ने फौती (उत्तराधिकार) कटवाने के लिए पटवारी को आवेदन दिया, लेकिन रिश्वत न देने पर काम अटक गया। पटवारी ने खुलेआम 10,000 रुपये की मांग की, वरना “फौती कभी नहीं कटेगी।”

दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। वे न धान बेच पा रहे हैं, न किसान एग्रीटेक या वारिसात पंजीकरण करा पा रहे हैं। पिता का लिया किसानी कर्ज चुकाने का बोझ भी उनके कंधों पर है, लेकिन बिना फौती के कोई सरकारी लाभ नहीं।

छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों के पटवारियों पर सख्ती: धमतरी में खुली छूट…

छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में पटवारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार पर तत्काल कार्यवाही हो रही है, लेकिन धमतरी जिला इस कड़ी में पिछड़ता नजर आ रहा है। सूरजपुर के लटोरी तहसील में पटवारी बालचंद राजवाड़े को शासकीय भूमि के रिकॉर्ड में हेराफेरी के लिए 1 अप्रैल 2025 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। जांच में पाया गया कि उन्होंने ग्राम मदनपुर के खसरा नंबर 83/2, 84, 89, 101, 104, 105, 108, 66, 48, 67, 68, 57, 58, 168 और 109 में छेड़छाड़ की, जो छोटे झाड़ जंगल की सरकारी जमीनें थीं। इनका नाम निजी व्यक्तियों के पक्ष में दर्ज कर दिया। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1968 के तहत अनुविभागीय अधिकारी ने सख्त कदम उठाया, बिना किसी आदेश प्रति के परिवर्तन को गैरकानूनी ठहराते हुए।
इसी तरह, दुर्ग में एक पटवारी को रिश्वतखोरी के दोष में बर्खास्तगी झेलनी पड़ी, जबकि बिलासपुर के तखतपुर में 11 वर्षों से गायब पटवारी को ड्यूटी लापरवाही पर पदच्युत किया गया। ये मामले साबित करते हैं कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है, जहां शिकायत मिलते ही जांच और कार्रवाई तुरंत होती है।
किंतु धमतरी में ऐसी सख्ती का अभाव है। यहां ग्राम घोटगांव के मुकेश कुमार मरकाम की शिकायत—पटवारी द्वारा 10,000 रुपये रिश्वत की मांग—4 नवंबर 2025 को कलेक्टर को सौंपी गई, लेकिन अब तक कोई जांच या कार्रवाई नहीं।
फौती कटवाने के नाम पर ग्रामीण दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, धान बिक्री और सरकारी लाभ से वंचित हैं। कलेक्ट्रेट में ही एक युवक का आत्मदाह प्रयास जमीन विवाद की अनसुनी फरियादों का नतीजा था। अन्य जिलों की तुलना में धमतरी की यह सुस्ती राजस्व अनियमितताओं को हौसला दे रही है, जहां निचले अधिकारी बेखौफ हैं। अगर तत्काल जांच कार्यवाही न हुई, तो धमतरी जिला भ्रष्टाचार का गढ़ बनने में कोई रोक नहीं सकता।
जमीन खरीदी मामले में गड़बड़ी का आरोप,कवर्धा तहसीलदार दुबे निलंबित
दुर्ग| दुर्ग संभागायुक्त सत्यनारायण राठौर ने कवर्धा कीतहसीलदार रश्मि दुबे को निलंबित कर दिया है। रश्मि दुबे पर आरोप है कि उन्होंने नायब तहसीलदार के पद पर पदस्थ होने के दौरान 50 वर्ष पुरानी जमीन किसी अन्य के नाम पर कर दी। जमीन जिसके नाम पर की उसने उस जमीन को बेच दिया। जमीन के मूल मालिक को न तो सूचना दी गई और न ही सुनवाई के लिए बुलाया गया। जमीन मालिक को जब इस बात की पता चली तो उसने कमिश्नर से पूरे मामले की शिकायत की। इसके बाद कमिश्नर ने रश्मि दुबे को सस्पेंड कर दिया। कमिश्नर राठौर ने बताया कि खैरागढ़ निवासी मनोज कुमार की शिकायत पर जांच के बाद कार्रवाई की गई।
- रामपुर निवासी देवेन्द्र साहू का भी मामला इसी से मिलता जुलता है, जहां एक और सीधे तहसीलदार पर कार्यवाही की गई जबकि धमतरी जिला में दस्तावेज में छेड़छाड़ करने करने वाले कोटवार पर भी कार्यवाही का आंच नहीं यह समझ से परे है…?.?. क्या धमतरी जिला में अलग तरीके का राजस्व अधिनियम चलता है..?.?.
चुनेश साहू 7049466638





