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कवर्धा में राज्योत्सव पर हंगामा, भाजपा नेताओं और पुलिस के बीच गाली-गलौज, धक्का-मुक्की

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अजय जांगड़े 8085164784

कवर्धा,छत्तीसगढ़ के 25वें राज्योत्सव का जश्न कवर्धा में उस वक्त बेमानी हो गया जब मंच के पास पुलिस जवानों और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच जमकर झड़प हो गई। बताया जा रहा है कि यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब पुलिस ने कुछ भाजपा नेताओं को मंच की ओर जाने से रोका। बात इतनी बढ़ी कि देखते ही देखते स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई — सत्ता के मद में चूर भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुलिस कर्मियों को खुलेआम माँ-बहन की गालियाँ देना शुरू कर दिया।

यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा के ही विधानसभा क्षेत्र का है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या कवर्धा पुलिस इस अभद्रता और अपमान पर कार्यवाही कर पाएगी, या फिर राजनीतिक दबाव में यह मामला भी “रफा-दफा” कर दिया जाएगा? प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पुलिस जवान कार्यक्रम स्थल पर अनुशासन बनाए रखने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं ने “हम सत्ता में हैं” का रौब दिखाते हुए पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश की। पुलिस के जवानों के साथ न केवल गाली-गलौज हुई बल्कि धक्का-मुक्की तक की नौबत आ गई।

नगर पालिका अध्यक्ष, भाजपा जिला पदाधिकारी और कुछ प्रभावशाली कार्यकर्ता इस विवाद के दौरान मौके पर मौजूद बताए जा रहे हैं। कई स्थानीय नागरिकों ने कहा — “राज्योत्सव का मंच जनता के लिए था, लेकिन भाजपा नेताओं ने उसे अपनी ताकत दिखाने का अखाड़ा बना दिया।”

पुलिस बनी बेबस दर्शक, प्रशासन मौन

राज्योत्सव जैसी गरिमामय सरकारी आयोजन में इस तरह का बवाल न केवल प्रशासन की निष्क्रियता को दर्शाता है, बल्कि शासन की छवि पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।

कवर्धा पुलिस के अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि वीडियो क्लिप और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं ।लोगों का कहना है  “जब गृह मंत्री के ही क्षेत्र में पुलिस को सत्ताधारी दल के कार्यकर्ता सरेआम अपमानित कर सकते हैं, तो आम नागरिक की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?”

सुशासन या सत्ता का आतंक?

भाजपा की सरकार अपने हर मंच से “सुशासन और कानून व्यवस्था” का ढोल पीटती रही है, लेकिन कवर्धा की यह घटना उन दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। कार्यक्रम की मर्यादा भंग होने, जनता के सामने पुलिस की बेइज़्ज़ती होने और अधिकारियों की चुप्पी — यह सब मिलकर राज्योत्सव की गरिमा को मिट्टी में मिला गया।

कवर्धा में अब चर्चाएँ जोरों पर हैं क्या इस मामले पर कार्यवाही होगी, या सत्ता का प्रभाव एक बार फिर न्याय पर भारी पड़ेगा?

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