
अजय जांगड़े 8085164784
कबीरधाम।छत्तीसगढ़ जब अपना 25वां स्थापना दिवस मना रहा है, तब कबीरधाम जिले की ज़मीन पर विकास की असल तस्वीर कुछ और ही कहानी सुना रही है। जिला मुख्यालय से महज़ कुछ किलोमीटर दूर बोड़ला मुख्य मार्ग से तिलईभाठ पहुंच मार्ग का निर्माण कार्य सरकार की योजनाओं में “पूरा” बताया जा रहा है, लेकिन हकीकत में यह अधूरी सड़क न केवल प्रशासनिक लापरवाही की मिसाल है, बल्कि भ्रष्टाचार के ठोस सबूत भी समेटे हुए है।
2.425 किलोमीटर की सड़क, 2.96 करोड़ की राशि — पर कार्य अधूरा!
इस परियोजना के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) कवर्धा संभाग द्वारा अनुबंध क्रमांक 95DL/2022-23 के तहत कार्यादेश जारी किया गया था।
ठेकेदार श्री तिलकराम चन्द्रवंशी को यह काम 2.425 किलोमीटर लंबाई और 2 करोड़ 96 लाख 71 हजार रुपये की लागत से सौंपा गया था।
परंतु क्षेत्र का दौरा करने पर साफ दिखता है कि न तो सड़क का निर्माण पूरा हुआ है और न ही गुणवत्ता का पालन किया गया। कई स्थानों पर डामर की परत उखड़ चुकी है, किनारों पर मुरुम फैला है, और कई हिस्सों में सड़क अधूरी पड़ी है।
सूचना पटल पर ‘कार्य पूर्णता तिथि’ गायब — क्या छिपाना चाहता विभाग?
निर्माण स्थल पर लगाए गए सूचना पटल में ठेकेदार, लंबाई, राशि और वर्ष तो अंकित है, मगर सबसे अहम विवरण — कार्य पूर्ण होने की तिथि — गायब है।
यह सवाल उठाता है कि क्या विभाग जानबूझकर इस जानकारी को छिपा रहा है ताकि निर्माण में देरी और गड़बड़ी को ढंका जा सके?
स्थानीय लोगों का कहना है कि “काम कब शुरू हुआ और कब खत्म होना था, कोई नहीं जानता, लेकिन भुगतान पूरा कर लिया गया।”
ठेकेदार की मनमानी और विभाग की चुप्पी ने बनाई भ्रष्टाचार की सड़क
गांव के ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क का निर्माण बिना सटीक बेस लेयर और बिना ठोस मुरुम फाउंडेशन के किया गया। ऊपर से बस एक परत डामर डाल दी गई, ताकि दूर से देखने पर सड़क नई लगे।
कुछ जगहों पर डामर की परत इतनी पतली है कि एक बारिश में ही बह गई।
ग्रामीण रामसाय नेताम बताते हैं, “सड़क बनते ही टूट गई। जहां से गुजरो, डामर के टुकड़े जूतों में चिपक जाते हैं। लगता है जैसे विकास का नाम लेकर पैसे का खेल खेला गया है।
जांच की मांग पर ‘मौन’ विभाग
स्थानीय लोगों द्वारा लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन को कई बार शिकायतें भेजी गईं, लेकिन न तो किसी तकनीकी टीम ने जांच की, न ही किसी अधिकारी ने मौके का निरीक्षण किया।
जनप्रतिनिधि भी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि विभाग और ठेकेदार दोनों ने ‘आपसी समझौते’ के तहत इस परियोजना को कागज़ों में ही पूरा कर दिया।
राज्योत्सव के मंच पर चमक, जमीनी स्तर पर धूल
जहां राज्योत्सव के मंचों पर करोड़ों खर्च कर सजावट और शोभा बढ़ाई जा रही है, वहीं कबीरधाम की ग्रामीण सड़कें लोगों के लिए संकट बन चुकी हैं।
बोड़ला से तिलईभाठ मार्ग पर रोजाना किसान, छात्र और ग्रामीण यात्री धूल, गड्ढों और कीचड़ से जूझ रहे हैं।
सड़क निर्माण की देरी से गांव का मुख्य बाजार तक पहुंचना मुश्किल हो गया है, जबकि बरसात के दिनों में वाहन फिसलकर दुर्घटनाएं भी हो रही हैं।
जनता का सवाल — क्या जांच होगी या फाइलों में दब जाएगी सच्चाई?
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से इस सड़क परियोजना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
उनका कहना है कि जब सूचना पटल पर ही कार्य पूर्णता की तारीख गायब है, तो यह साफ संकेत है कि विभाग कुछ छिपा रहा है।अगर भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगी, तो यह सड़क आने वाले वर्षों तक जनता के पैसे पर किया गया ‘डामरी धोखा’ बनकर खड़ी रहेगी।





