
लोरमी – छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन लिमिटेड के अधीन आने वाले सारधा (वेयरहाउस) लोरमी में चावल की हेरा-फेरी का बड़ा मामला सामने आया है। स्थानीय उचित मूल्य दुकान संचालकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वेयरहाउस प्रभारी रामबिहारी पैकरा और कंप्यूटर ऑपरेटर चंदाकर के द्वारा लंबे समय से चावल की चोरी और वजन में हेराफेरी का गोरखधंधा चल रहा है।
वास्कल बंजारे व लखन लाल यादव से मिली जनकारी के अनुसार, बरबसपुर वेयरहाउस के धर्मकांटा में चावल का वजन 239.00 क्विंटल, लोरमी धर्मकांटा में 239.00 क्विंटल, जबकि सारधा वेयरहाउस पहुंचने पर अचानक वजन 242.00 क्विंटल दर्ज किया गया। इस प्रकार कुल 2 क्विंटल चावल की हेरा-फेरी का मामला उजागर हुआ है। सवाल यह है कि जब एक ही खेप तीनों स्थानों पर अलग-अलग वजन के साथ दर्ज की गई, तो यह गड़बड़ी आखिर कैसे हुई और इसका जिम्मेदार कौन है?
इस पूरे मामले पर उचित मूल्य दुकान संचालक वास्कल बंजारे और लखनलाल यादव, जो कि शासकीय उचित मूल्य दुकान विक्रेता कल्याण संघ जिला अध्यक्ष भी हैं, ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि –
> “हर महीने चावल के आवंटन में कटौती की जाती है, और साल के अंत में सत्यापन के नाम पर फिर से कटौती कर दी जाती है। इससे दुकानदारों पर दबाव बनता है और गरीब हितग्राहियों को पूरा अनाज नहीं मिल पाता।”
संचालकों ने सवाल उठाया है कि जब हर माह कटौती और वजन में हेरा-फेरी का खेल चलता है, तो आखिर इस भ्रष्टाचार के पीछे कौन से अधिकारी हैं? क्या वेयरहाउस प्रभारी और ऑपरेटर के ऊपर खबर प्रकाशन के बाद कार्रवाई होगी, या यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा?
जनता और संचालकों की मांग है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच हो ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर कैसे सरकारी चावल का हिसाब-किताब गुम हो जाता है। यदि यही स्थिति रही, तो आने वाले समय में खाद्य सुरक्षा योजना की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिन्ह लगना तय है।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर कब रुकेगा “चावल हेरा-फेरी का यह गोरखधंधा” और कब तक गरीब हितग्राहियों का हक यूँ ही तौल तराजू में कम किया जाता रहेगा।





