
कवर्धा/पंडरिया। कुकदूर परियोजना अंतर्गत बोहिल-1 पीपा टोला स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का हाल सरकार और महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की सच्चाई बयां करता है। केंद्र अधिकांश दिनों में बंद रहता है और पदस्थ कार्यकर्ता नियमित रूप से अनुपस्थित पाई जाती हैं। इस वजह से न केवल न्यायालय के आदेशों की अवमानना हो रही है बल्कि मासूम बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार और शिक्षा से भी वंचित होना पड़ रहा है।
फिफलीपानी से आती हैं कार्यकर्ता, समय पर नहीं पहुँच पातीं
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र में पदस्थ कार्यकर्ता फिफलीपानी से आती हैं। उन्हें केंद्र तक पहुँचने के लिए घने जंगल, पहाड़ी और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। यही कारण है कि वह समय पर ड्यूटी नहीं कर पातीं और कई दिनों तक केंद्र बंद ही रहता है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब कार्यकर्ता का निवास स्थान इतना दूर है तो विभाग ने नियुक्ति करते समय इस पहलू को क्यों नजरअंदाज किया?
मासूम बच्चों को नहीं मिल रहा पोषण आहार
आंगनबाड़ी केंद्र के बंद रहने से मासूम बच्चों को सरकारी योजना के तहत मिलने वाला पोषण आहार, पूरक आहार और गर्म भोजन समय पर नहीं मिल पा रहा है। बच्चों के लिए यह सुविधा अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि अधिकांश परिवार गरीब और आदिवासी हैं, जो घर पर संतुलित आहार उपलब्ध नहीं करा सकते। ऐसे में केंद्र का बंद होना सीधे-सीधे बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर पर असर डाल रहा है।
शिक्षा और संस्कार से भी वंचित
सिर्फ भोजन ही नहीं बल्कि केंद्र में दी जाने वाली पूर्व-प्राथमिक शिक्षा, खेलकूद और संस्कार भी प्रभावित हो रहे हैं। आंगनबाड़ी को बच्चों के लिए शिक्षा की पहली सीढ़ी माना जाता है, लेकिन कार्यकर्ता की अनुपस्थिति ने बच्चों को इस अवसर से भी वंचित कर दिया है। शिक्षा और पोषण से वंचित रहना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है, जिसकी भरपाई संभव नहीं।
विभागीय आदेशों की अनदेखी
महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि आंगनबाड़ी केंद्र निर्धारित समय पर खुले और बच्चों को सभी सेवाएँ नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाएं। सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय ने भी अपने आदेशों में आंगनबाड़ी केंद्रों को सुचारु रूप से संचालित करने पर जोर दिया है। बावजूद इसके कुकदूर परियोजना के अधिकारी आदेशों की लगातार अनदेखी कर रहे हैं। यह न केवल शासन की महत्वाकांक्षी योजना को कमजोर कर रहा है बल्कि सीधे-सीधे न्यायालय की अवमानना भी है।
स्थानीय कार्यकर्ता की नियुक्ति की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि समस्या का स्थायी समाधान तभी होगा जब स्थानीय महिला को कार्यकर्ता के रूप में नियुक्त किया जाए। स्थानीय महिला के नियुक्त होने से वह प्रतिदिन समय पर केंद्र तक पहुँच सकेगी और बच्चों को पोषण आहार, शिक्षा तथा अन्य सेवाएँ बिना बाधा के मिल सकेंगी।
जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार इसकी मौखिक शिकायत परियोजना अधिकारी और विभागीय अधिकारियों से की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारी मानो गहरी नींद मे हैं। आंगनबाड़ी केंद्र बंद – मासूम बच्चों की थाली और पढ़ाई दोनों खाली पड़ी है फिफलीपानी से आती है कार्यकर्ता, बोहिल-1 के बच्चे पोषण और शिक्षा से वंचित।





