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भ्रष्टाचार का काला सच: नेऊर सेक्टर पर्यवेक्षक की जबरन वसूली का मामला आया सामने, क्या कर सकते हैं सीडीपीओ 

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✍️ अजय जांगड़े
कवर्धा: महिला बाल विकास विभाग में भ्रष्टाचार का एक और काला सच सामने आया है। एकीकृत महिला एवं बाल विकास विभाग कुकदूर परियोजना के नेऊर सेक्टर पर्यवेक्षक पूर्णिमा जड़ेजा पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से जबरन वसूली करने का आरोप लगा है। आरोप है कि पर्यवेक्षक पूर्णिमा जड़ेजा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से स्व सहायता समूहों की पोषण आहार हेतु देयक राशि में से 10 प्रतिशत तक की वसूली करती हैं।

 

भ्रष्टाचार की हद
पर्यवेक्षक की इस भ्रष्टाचार की हद ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पर्यवेक्षक की इस कृत्य से आंगी बाड़ी कार्यकर्ताओं को भी इस घिनौने कार्य में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता है। कार्यकर्ताओं के मनाही करने पर उनके मानदेय राशि में कटौती व अनियमित उपस्थिति सहित अनियमितता का आरोप लगा उच्च अधिकारी को संप्रेषित करने की धमकी दी जाती है।
महिला गोपनीयता का उल्लंघन, निजता पर अंकुश निजी जीवन पर भी करते हैं हस्तक्षेप 
महिला शासकीय सेवकों की समीक्षा, मासिक व अन्य आवश्यक बैठकों में उनके पति की उपस्थिति मौजूद रहती है जो महिला गोपनीयता व महिलाओं के सम्मान में अपराधिक गतिविधि को जन्म देने की संकेत देती है। सरकारी कार्य और सरकारी नियम को ताक पर रखते हुए अपने मर्जी से न कि आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन कराती हैं बल्कि बच्चों के जीवन से भी खिलवाड़ करती हैं।
कार्रवाई की मांग
कार्यकर्ताओं ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए इस तरह की बर्ताव और सरकार के साथ छलावा करने की अपेक्षा अपनी सेवा समाप्त करने की गुहार सरकार के पास रखना पसंद कर रही हैं। जिला प्रशासन को चाहिए कि इस तरह के कृत्य करने वाली एकीकृत महिला एवं बाल विकास विभाग कुकदूर परियोजना के ऊपर तत्काल सेवा समाप्त कर गोपनीय तरीके से उच्च स्तर की जांच कर दांडिक कार्यवाही किए जाए।
वायरल दस्तावेज में 34 आंगनबाडियों का अप्रत्यक्ष रूप से वसूली का उल्लेख है तो वहीं ऑडियो वीडियो भी होने की बात कही गई है।
वसूली होने वाले कुछ वायरल दस्तावेज साक्ष्य के रूप सुरक्षित हैं जिस पर रिमार्क देकर वसूली कार्य को अंजाम दिया जाता है जो वायरल हो रहा है। नादान, मासूम बच्चों की हकमारी को रोका जा सके इसलिए जिला प्रशासन को तत्काल कार्यवाही करने की आवश्यकता है।
कार्रवाई की जरूरत
सरकार को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए और इस तरह के भ्रष्टाचार और अनियमितता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। दोषी पर्यवेक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और विभाग की कार्य प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए, क्या जिला प्रशासन और परियोजना स्तर पर कार्यवाही करने में सक्षमता दिखाएंगे अधिकारी या वह भी उसी वसूली से अपनी हिस्सा लेने की कोशिश करेंगे जब कार्यवाही नहीं करेंगे तो।

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