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जलजमाव बना मरीजों की राह का रोड़ा, 20 दिनों से परेशान उपस्वास्थ्य केंद्र जवाली – जिम्मेदार बेपरवाह!

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कोरबा/कटघोरा:-राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित उप स्वास्थ्य केंद्र जवाली इन दिनों खुद बीमार पड़ा है – वजह है उसके सामने का घुटनों तक भरा गंदा पानी! विडंबना देखिए कि जहां लोगों को इलाज मिलना चाहिए, वहां तक पहुंचना खुद एक जंग बन गया है।

लगातार बारिश के चलते जवाली स्वास्थ्य केंद्र के सामने करीब 50 मीटर का रास्ता जलमग्न है। कीचड़, मच्छरों और दुर्गंध के बीच होकर रोजाना दर्जनों मरीज अपनी जान जोखिम में डालकर इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि वृद्ध और गर्भवती महिलाएं पानी में गिरते-संभलते केंद्र तक पहुंच रही हैं।

प्रशासन को दी गई सूचना, लेकिन कोई असर नहीं!
स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत एएनएम, एमपीडब्ल्यू, मितानिन और आरएचओ कर्मचारी पहले ही इस गंभीर स्थिति की मौखिक सूचना ग्राम पंचायत व जनप्रतिनिधियों को दे चुके हैं। बावजूद इसके, अब तक कोई स्थायी या अस्थायी समाधान नहीं किया गया!

 

 

         (तीज राम चौकसे  अधिवक्ता )     

तीजराम चौकसे (63), अधिवक्ता कटघोरा – खुद इस अव्यवस्था का शिकार बने। उन्होंने बताया कि पानी के कारण उन्हें अपनी मोटरसाइकिल सड़क किनारे छोड़कर, पैदल कीचड़ और गंदगी से होकर केंद्र तक जाना पड़ा। “यह समस्या 20 दिन से है, लेकिन अब तक किसी जिम्मेदार की नींद नहीं खुली है।”

राज्य और केंद्र सरकार की योजनाएं कागजों पर चमक रही हैं, जमीनी हकीकत शर्मनाक!
जहां सरकारें मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, परिवार नियोजन, मलेरिया-डेंगू उन्मूलन जैसे दर्जनों योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के दावे कर रही हैं, वहीं उप स्वास्थ्य केंद्र जैसी बुनियादी इकाई तक पहुंचना ही एक चुनौती बन गया है।

स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाने वाले इस केंद्र की हालत खुद प्रशासन की जागरूकता पर सवाल खड़े कर रही है।

अब सवाल ये है:-क्या जनप्रतिनिधि और स्वास्थ्य विभाग सिर्फ योजनाओं के पोस्टर छपवाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान चुके हैं?

क्या जल निकासी जैसे बुनियादी काम के लिए भी किसी बड़ी दुर्घटना या जनाक्रोश का इंतजार हो रहा है?

क्या मरीजों को कीचड़ और बीमारी में डूब कर ही ‘स्वस्थ भारत’ का सपना पूरा करना होगा?

ग्रामीणों की मांग है कि:-तुरंत जल निकासी की व्यवस्था हो,सड़क की ऊंचाई और पक्कीकरण का स्थायी समाधान हो,स्वास्थ्य केंद्र तक सुगम पहुंच की गारंटी सुनिश्चित की जाए,जब तक प्रशासन जागेगा, तब तक शायद कई मरीज पानी में गिर चुके होंगे और सरकार की छवि एक और बार कीचड़ में सनी मिलेगी।

“स्वास्थ्य सेवा की पहली शर्त है – पहुंच. जब पहुंच ही न हो, तो सेवा किस काम की?”

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