

कोरबा/पाली:-पाली विकासखंड की शिक्षा व्यवस्था में बच्चों से बेंच ढुलवाने जैसी शर्मनाक हरकत के सामने आने के बाद पूरे इलाके में आक्रोश है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि शिक्षा विभाग और BEO साहब को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। उन्होंने मामले को ‘निपटाने’ के लिए सिर्फ एक चेतावनी पत्र थमा कर इतिश्री कर ली!
सबूत हैं साफ, गवाही दे रहीं तस्वीरें… लेकिन कार्रवाई? जी नहीं!
पूर्व माध्यमिक शाला रजकम्मा की तस्वीरें सब कुछ बयां कर रही हैं। बच्चे भारी बेंच अपने कंधों पर लादकर स्कूल परिसर तक ले जा रहे हैं।लेकिन अफसरों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।
शिक्षक अब भी स्कूल में विराजमान हैं।और विभाग की तरफ से बस एक कागज़ उड़ाया गया – चेतावनी का!
बीईओ साहब की “मेहरबानी” का नमूना…
बीईओ साहब ने सिर्फ एक “चेतावनी पत्र” देकर शिक्षक को बचा लिया। यह चेतावनी पत्र पत्रकार के मोबाइल पर भेजा गया, यह स्पष्ट संकेत है कि पूरे मामले को दबाने और शिक्षक को बचाने का प्रयास किया गया।जांच और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दिखावा किया गया।
तस्वीरें गवाह थीं, गलती साबित थी – फिर भी विभाग मौन है। यही है बीईओ साहब की ‘मेहरबानी’।
मतलब – बच्चों से मजदूरी कराओ, फोटो में पकड़ जाओ और फिर भी बस ‘आगे से मत करना’ कह कर छोड़ दिया जाए!
क्या शिक्षा विभाग की नैतिक जिम्मेदारी इतनी हल्की हो गई है?
यह न्याय नहीं, समझौता है!
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) और बाल श्रम कानून का ये सरासर उल्लंघन था, लेकिन अफसरों ने इसे एक हल्के नोट पर निपटा दिया।
कोई निलंबन नहीं!
अब सवाल ये नहीं कि चेतावनी दी गई या नहीं… सवाल ये है कि क्या इतना बड़ा क़ानूनी उल्लंघन सिर्फ ‘चेतावनी’ में खत्म हो जाएगा?
इस मामले में BEO साहब की ‘मेहरबानी’ और विभाग की ‘नरमी’ आने वाले समय में और कितने बच्चों से बेंच उठवाएगी – इसका जवाब तो जनता मांगेगी ही!





