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बुद्ध से एक शिष्य ने पूछा था कि उपदेश देते समय गुरु ऊपर ही क्यों बैठते हैं और हम सुनने वाले नीचे क्यों

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गुरु का स्थान सबसे बड़ा ~
5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। शिक्षक यानी गुरु का स्थान सबसे ऊंचा माना गया है। गुरु के बिना ज्ञान नहीं मिलता है। माता-पिता के बाद गुरु ही हमें सही-गलत का अंतर बताते हैं। गुरु के उपदेश से ही जीवन सफल हो जाता है। गुरु का स्थान सबसे ऊंचा होता है, इसीलिए श्रीराम, श्रीकृष्ण, हनुमान जी सहित सभी देवी-देवताओं ने गुरु से ही ज्ञान प्राप्त किया है। श्रीराम ने वशिष्ठ जी और विश्वामित्र को गुरु बनाया। वनवास के समय श्रीराम कई ऋषि-मुनियों के आश्रम गए सभी से ज्ञान हासिल किया। श्रीकृष्ण ने ऋषि सांदीपनि को गुरु बनाया।
हनुमान जी ने सूर्य देव को गुरु बनाया था। इस संबंध में कथा प्रचलित है कि जब हनुमान जी ने सूर्य देव से गुरु बनने की प्रार्थना की तो सूर्य ने मना कर दिया था। सूर्य भगवान ने कहा था कि मुझे हर पल चलते रहना होता है, मैं एक पल भी कहीं रुक नहीं सकता, ऐसे में उपदेश देना संभव नहीं है। तब हनुमान जी ने कहा कि मैं आपके साथ चलते-चलते शिक्षा ग्रहण कर लूंगा । आप बोलते जाना और मैं उपदेश ग्रहण करता रहूंगा । इस बात के लिए सूर्य तैयार हो गए।
उपदेश देने वाला हमेशा ऊपर ही क्यों बैठता है?
एक बार गौतम बुद्ध से उनके एक शिष्य ने पूछा था कि उपदेश देते समय आप ऊपर ही क्यों बैठते हैं और हम सुनने वाले नीचे क्यों बैठते हैं?
गौतम ने शिष्य की बातें ध्यान से सुनी और बोले कि मैं तुम्हें इस प्रश्न का उत्तर दूंगा , लेकिन पहले तुम ये बताओ कि क्या तुमने कभी झरने में से पानी पिया है?
शिष्य ने उत्तर दिया कि हां , मैंने झरने में से पानी पिया है।
बुद्ध ने फिर पूछा कि अच्छा तुम ये बता सकते हो कि उस समय तुम्हारी और झरने स्थिति कैसी थी ?
शिष्य ने कहा कि झरना तो ऊपर से नीचे बह रहा था और मैं नीचे खड़ा हुआ था। उसी स्थिति में मैंने पानी पिया था।
तथागत ने उस शिष्य को समझाया कि बस यही व्यवस्था उपदेश देने वाले और सुनने वाले के लिए होती है। उपदेश भी झरने की तरह हैं, जो लोग उपदेश ग्रहण करना चाहते हैं, उपदेशों का रसपान करना चाहते हैं, उन्हें नीचे ही बैठना चाहिए। उपदेश देने वाला ऊपर बैठेगा और सुनने वाला नीचे बैठेगा, सिर्फ तभी लोगों तक सही ज्ञान पहुंच सकता है। इस व्यवस्था से अहंकार का भी नाश होता है।
गुरु के सामने अहंकार छोड़कर ही जाना चाहिए, गुरु की सीख हमारा जीवन बदल सकती है।

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