
*कारगिल गार्डन में भूतपूर्व सैनिक परिषद द्वारा मनाया गया कारगिल विजय दिवस….*
छत्तीसगढ़/धमतरी:-
देश में आज करगिल विजय दिवस (Kargil Vijay Diwas) मनाया जा रहा है. इस मौके पर देश के लिए कुर्बानी देने वाले वीर सपूतों के शौर्य को याद किया जा रहा है. दोनों देशों के बीच 1999 में लड़े गए युद्ध को जीतने की याद में हर साल 26 जुलाई को करगिल विजय दिवस (Kargil Vijay Diwas) मनाया जाता है. पाकिस्तानी सेना ने घुसपैठ कर जिन जगहों पर कब्जा कर लिया था, भारत के जांबाज फौजियों ने उन दुर्गम स्थानों पर दोबारा तिरंगा फहराया था. 60 दिन से ज्यादा चलने वाली इस लड़ाई को ऑपरेशन विजय नाम दिया गया था.
धमतरी जिला में भूतपूर्व सैनिक परिषद के तत्वावधान में कारगिल गार्डन, बिलाई माता, दानीटोला में कारगिल विजय दिवस मनाया गया साथ ही शहीद वीर सपूतों को नमन किया गया जिसमें बतौर मुख्य अतिथि- श्री राजेशशर्मा ,अध्यक्षता,विशिष्ठ अतिथि श्री डी. आर गजेन्द
(पूर्व विकासखंड शिक्षाधिकारी), श्री आनंद पवार (कर्म समाज सेवी),श्री भूषण सेठिया जी (समाज सेवी) श्री उमेश साहू
( सांसद प्रतिनिधि महासमु),श्री के.पी साहु- अध्यक्ष अ. भा. पू. से. परिषद सचिव, श्री मुरारी साहू,रामचन्द्र देवांगन – उपाध्यक्ष, चन्द्रकुमार भटु नं, प्राणसिंग सिन्हा, चेतन सिन्हा – मिडिया प्रभारी कोषाध्यक्ष,टिवेश साहू – संरक्षक ,लक्षण साहू,जे. एल मण्डावी,तुलसी राम साहू,अजय गोस्वामी,लोकनाथ निषाद,भूषण साहु,अश्वनी कुमार पाटकर, एस के सोनी चुरामन सिंग अरुण कुमार, दशरथ सिंह नेताम एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे
दरअसल, सर्दियों के मौसम में सैनिक ऊंची चोटियों पर अपनी पोस्ट छोड़कर निचले इलाकों में आ जाते थे. पाकिस्तान और भारतीय दोनों सेनाएं ऐसा करती थीं. लेकिन पाकिस्तानी सैनिकों ने चुपके से घुसपैठ करके प्रमुख चोटियों पर कब्जा कर लिया था. भारतीय सेना को इस घुसपैठ की जानकारी चरवाहों से मिली. चरवाहों ने पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों को वहां देख लिया था. इसके बाद भारतीय सेना ने घुसपैठियों से अपनी जमीन को खाली कराने के लिए ‘ऑपरेश विजय’ चलाया. 60 दिन से ज्यादा चलने वाली इस लड़ाई में 527 भारतीय जवान शहीद हुए थे.
कारगिल युद्ध का कारण
ये लड़ाई जम्मू-कश्मीर के कारगिल जिले में साल 1999 में मई से जुलाई के बीच हुई थी.पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को जानकारी दिए बिना तत्कालीन पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ ने कारगिल में घुसपैठ करवाई थी.अक्टूबर 1998 में उस समय के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने करगिल प्लान को मंजूरी दी थी. कारगिल की ऊंची पहाड़ियों पर पाकिस्तान के सैनिकों ने कब्जा कर लिया था. नियंत्रण रेखा के जरिये घुसपैठ करने की साजिश थी. भारतीय नियंत्रण रेखा (एलओसी) से पाकिस्तानी सैनिकों को हटाने के लिए ये युद्ध हुआ.
भाड़ी मात्रा में रॉकेट और बमों का प्रयोग
इस युद्ध में भाड़ी मात्रा में रॉकेट और बमों का प्रयोग किया गया था। करीब दो लाख पचास हजार गोले, बम और रॉकेट दागे गए थे। करीब 5 हजार तोपखाने के गोले, मोर्टार बम और रॉकेट 300 बंदूकें, मोर्टार और एमबीआरएल से प्रतिदिन दागे जाते थे. जिस दिन टाइगर हिल को वापस लाया गया था उस दिन 9 हजारगोले दागे गए थे.ऐसा कहा जाता है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह एकमात्र युद्ध था जिसमें दुश्मन सेना पर इतनी बड़ी संख्या में बमबारी की गई थी। अंत में, भारत ने एक जीत हासिल की।
चुनेश साहू 7049466638





