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धमतरी: मां अभियान,…’जल जगार’ के दावों के बीच जल संसाधन प्रबंध संभाग कोड नंबर 38 की बड़ी लापरवाही, फौजी कॉलोनी जलमग्न, खेतों में तबाही..

 

 

 

धमतरी

 

जिस धमतरी जिले ने जल संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई और जिसे प्रधानमंत्री अवार्ड के लिए नामांकित किया गया, आज वही जिला प्रशासनिक अदूरदर्शिता और जल संसाधन विभाग कोड नंबर 38 की घोर लापरवाही का शिकार हो रहा है। रविशंकर जलाशय (गंगरेल) के किनारे से शुरू हुए ‘जल जगार’ महोत्सव की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि विभाग की ‘कुंभकर्णी नींद’ और लापरवाही क्रियाकलापों ने शहर के कॉलोनियों एवं नहर किनारे के खेतों में लबालब पानी की लाखों लीटर पानी बर्बादी के चलते कॉलोनी भी तालाब पोखरों जैसी स्थिति निर्मित कर दी है। विभाग की लापरवाही का ताजा शिकार शहर की फौजी कॉलोनी बनी है,। 

 

 

 

विभाग का वरिष्ठ अधिकारी का गैरजिम्मेदाराना जवाब

 

जल संसाधन प्रबंध संभाग कोड नंबर 38 के एक वरिष्ठ अधिकारी को मामले में शिकायत किया और उनका पक्ष भी जाना गया जिसमें नाली नहरों में टूटफूट में गैरजिम्मेदाराना जवाब मिला साथ ही नगर निगम से निस्तारी के एवज में जमा एवं बकाया राशि के बारे में जानने की कोशिश की है तो उक्त वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि क्या आपको क्या करना है , राशि आप दिलवाओगे क्या , ये सब जानकारी हम नहीं दे सकते और जानकारी इसकी मुझे नहीं है मेरे से ऊपर ऑफिस में है , आज तक कोई पत्रकार ये जानकारी मांगा नहीं आपको क्या करना है आप दिला दोगे क्या पैसा…

 

वहीं कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी को ये सब जानकारी देने का पावर नहीं है मेरे ऑफिस से मेरे बगैर विभाग का कोई भी आदमी आपको जानकारी नही देगा…..

उक्त वरिष्ठ अधिकारी आगे कहते हैं कि मेरे पास दस ठोक काम है यही सब देखते रहूंगा क्या.. आपको जो भी जानकारी चाहिए जिला जनसंपर्क के माध्यम से दूंगा आपको ऐसे जानकारी नहीं दूंगा…उक्त अधिकारी के बातों से स्पष्ट होता है कि विभाग को पानी बहे, कॉलोनी में घुसे या किसी के घर में घुसे उनको कोई मतलब नहीं है उनके पास दस ठोक काम है ये सब छोटी बाते है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि तत्कालीन कलेक्टर नम्रता गांधी और वर्तमान कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के महत्वकांक्षी एवं महती योजना को पानी पानी करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

 

 

 

विभाग का गैरजिम्मेदाराना रवैया

 

भीषण गर्मी को देखते हुए कलेक्टर के निर्देशानुसार जिले के एवं नगर निगम क्षेत्र के तालाबों में निस्तारी के गंगरेल निस्तारी पानी छोड़ा गया है । निर्देश स्पष्ट थे कि पानी का सदुपयोग हो और वह बिना बर्बादी के सीधे तालाबों तक पहुंचे। लेकिन जल संसाधन प्रबंध संभाग (कोड नंबर 38) के अधिकारियों ने कागजों पर ही तालाबों ने निस्तारण कर दिए धरातल पर नहरों और नालियों की सफाई मरमत देखरेख कराना भूल गए ,फौजी कॉलोनी एवं आसपास लगे कॉलोनी के पास से गुजरने वाली केनाल नली कचरे और गाद से पटी होने के कारण जाम हो गई। परिणाम स्वरूप, पानी तालाब पहुंचने के बजाय पूरी रात रिहायशी इलाके में फैलता रहा। सुबह जब वार्डवासी जागे, तो सड़कें दरिया बन चुकी थीं और घरों के आंगन में घुटनों तक पानी भरा था। नितेश साहू, लोमेश देवांगन और विजय साहू जैसे स्थानीय निवासियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि बार-बार विभाग को आगाह करने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिसका खामियाजा आज पूरी कॉलोनी भुगत रही है। वहीं विभाग से बातचीत शिकायत करने पर विभाग अपना पल्ला झाड़ते हुए नजर आए। यह न केवल पानी की बर्बादी है, बल्कि सरकारी तंत्र के में चल रहा एक बड़ा लापरवाही पूर्ण रवैया है, जो शासन के राजस्व को लाखों का चूना लगा रहा है।

शहरी जलभराव के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में भी विभाग के कुप्रबंधन का कहर टूटा है। नगरी ब्लॉक के ग्राम गोरेगांव में जल प्रबंधन की विफलता के कारण किसान लेखराज साहू की कड़ी मेहनत से तैयार कद्दू और अन्य सब्जियां जलमग्न होकर सड़ चुकी हैं। खेतों में हफ्ते भर से पानी भरा होने के कारण लाखों का नुकसान हो चुका है। किसान ने मुआवजे की गुहार लगाई है, लेकिन जल संसाधन विभाग के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। एक ओर प्रशासन ‘नारी शक्ति से जल शक्ति’ और ‘जल प्रहरियों’ के माध्यम से बूंद-बूंद बचाने का ढोंग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर विभाग की आंखों के सामने लाखों लीटर पानी व्यर्थ बहकर बर्बादी का सबब बन रहा है। और तत्कालीन एवं वर्तमान कलेक्टर की मंसूबों पर पानी फेर जल संरक्षण योजनाओं को पलीता लगता हुआ जल संसाधन प्रबंध संभाग कोड नंबर 38 है।

 

  

 

‘माँ’ और ‘जल जगार’ अभियान के उद्देश्यों पर कुठाराघात

 

मई 2025 में शुरू हुए ‘मां’ (महानदी जागरूकता अभियान) का उद्देश्य महानदी के उद्गम स्थल सिहावा से लेकर गंगरेल तक नदी को जल स्त्रोत पूर्ण स्वच्छ और अतिक्रमण मुक्त बनाना था। इसी तरह गंगरेल बांध के संरक्षण और भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए तात्कालिन कलेक्टर नम्रता गांधी के नेतृत्व में शुरू की गई एक अनूठी पहल है। 5-6 अक्टूबर 2024 को गंगरेल में ‘जल-जगार महोत्सव’ मनाया गया, जिसमें ‘नारी शक्ति से जल शक्ति’ और जल संचयन के माध्यम से जल संकट को कम करने पर जोर दिया गया, तथा 400+ स्टॉप डेमों का उपयोग किया गया ‘जल जगार’ अभियान के तहत भू-जल स्तर सुधारने के लिए बड़े-बडे़ दावे किए गए थे। लेकिन जल संसाधन विभाग प्रबंध संभाग-38 की वर्तमान गैरजिम्मेदाराना कार्यप्रणाली इन सभी महत्वाकांक्षी अभियानों एवं कलेक्टर की मंसूबे साख पर बट्टा लगा रही है। जब विभाग एक कॉलोनी को जलभराव से नहीं बचा सकता और नहरों की सामान्य सफाई नहीं सुनिश्चित कर सकता, तो महानदी के पुनरुद्धार जैसे बड़े लक्ष्य केवल नारों तक सीमित नजर आते हैं।

 

जिम्मेदारों की चुप्पी और जनता का आक्रोश

 

हैरानी की बात यह है कि कलेक्टर के सख्त निर्देशों के बावजूद विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले पर मौन साधे हुए हैं। फौजी कॉलोनी के निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ड्रेनेज सिस्टम और नहरों की सफाई का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। गर्मी के इस मौसम में जहां पानी की एक-एक बूंद के लिए हाहाकार मचने वाला है, वहां विभाग की यह लापरवाही किसी अपराध से कम नहीं है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन लापरवाह अधिकारियों कर्मचारियों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई करता है, या फिर ‘जल संरक्षण’ का यह वैश्विक मॉडल फाइलों में ही सिमट कर रह जाएगा।

 

   

कलेक्टर का बयान

 

मामले में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने संज्ञान लेने की बात कही साथ ही जहां जहां ऐसी स्थिति बन रही है तत्काल विभाग को बोलकर मरम्मत मॉनिटरिंग के निर्देश के लिए निर्देशित करने का आश्वाशन दिया।

 

 

 

बहरहाल देखना होगा कि अब आगे क्या कार्यवाही की जावेगी या जल संरक्षण का नारा केवल फाइल या दीवार लेखन तक सिमट के रह जाएगी।

 

 

 

चुनेश साहू 7049466638

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