
अजय जांगड़े
कवर्धा,कबीरधाम जिले के पंडरिया जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत लोखान में मनरेगा योजना के नाम पर जिस बेशर्मी से भ्रष्टाचार किया जा रहा है, उसने पूरे प्रशासनिक ढांचे की पोल खोलकर रख दी है। कागजों में “नाली निर्माण” और जमीन पर मिट्टी का खेल—यही है विकास का असली चेहरा, जिसे जिम्मेदार अधिकारी ढकने में जुटे हैं।
मौके पर लगे नागरिक सूचना पटल में स्पष्ट रूप से नाली निर्माण कार्य दर्ज है, लेकिन जमीनी सच्चाई इस दावे का मजाक उड़ाती नजर आती है। जहां गुणवत्ता युक्त निर्माण होना था, वहां मुरम और गिट्टी की जगह मिट्टी और रेत डालकर सरकारी पैसे की खुलेआम लूट की जा रही है। नाली की ऊंचाई महज 12 इंच रखकर काम पूरा दिखाया जा रहा है—यह सीधा-सीधा जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा है।
“कलेक्टर को अंगूठा, जनता को धोखा”
स्थिति इतनी गंभीर है कि यह कहना गलत नहीं होगा कि संबंधित अधिकारी कलेक्टर और शासन के निर्देशों को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं। मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी से लेकर जिला पंचायत के जिम्मेदार अफसरों तक—सबकी चुप्पी इस भ्रष्टाचार में उनकी मिलीभगत की ओर इशारा करती है।
कमरखोल बना भ्रष्टाचार का अड्डा
ग्राम पंचायत लोखान का आश्रित ग्राम कमरखोल (गोर्रा कोन्हा) आज भ्रष्टाचार का प्रतीक बन चुका है। यहां विकास कार्य नहीं, बल्कि सरकारी राशि की बंदरबांट का खेल चल रहा है। ग्रामीणों में आक्रोश है, लेकिन सिस्टम की खामोशी इस गड़बड़ी को बढ़ावा दे रही है।
“ऊपर तक सेटिंग”—इसीलिए नहीं हो रही कार्रवाई?
सूत्र साफ इशारा कर रहे हैं कि इस घोटाले के तार ऊपर तक जुड़े हैं। यही वजह है कि शिकायतों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही। सवाल उठता है—क्या पूरा सिस्टम इस लूट में साझेदार बन चुका है?
यह लापरवाही नहीं, सीधा आर्थिक अपराध है
यह मामला अब साधारण अनियमितता नहीं रहा, बल्कि स्पष्ट रूप से आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है। अगर ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो मनरेगा जैसी योजनाएं सिर्फ भ्रष्टाचार का अड्डा बनकर रह जाएंगी।
जनता की चेतावनी: अब बर्दाश्त नहीं होगा
क्षेत्र के लोगों ने दो टूक शब्दों में मांग रखी है—
पूरे मामले की सीबीआई या उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच हो।
दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए।
लूटी गई सरकारी राशि की एक-एक पैसे की वसूली हो।
आखिर कब जागेगा प्रशासन?
अगर अब भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह साफ हो जाएगा कि भ्रष्टाचार केवल नीचे नहीं, बल्कि व्यवस्था की नसों में दौड़ रहा है।
यह खबर चेतावनी है—या तो भ्रष्टाचार खत्म होगा, या फिर जनता जवाब मांगेगी… और इस बार जवाब देना आसान नहीं होगा।





