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फर्जी निवास प्रमाण पत्र पर एपीओ नियुक्ति का मामला , सांसद ने दिए कार्यवाही के निर्देश

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फर्जी निवास प्रमाण पत्र पर एपीओ नियुक्ति का मामला , सांसद ने दिए कार्यवाही के निर्देश

 

चुनेश साहू । धमतरी 

जिला पंचायत धमतरी में संविदा सहायक परियोजना अधिकारी (एपीओ) की नियुक्ति को लेकर उठा विवाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है। आरोप है कि वर्तमान में कार्यरत एपीओ ने वर्ष 2011 में कूटरचित और फर्जी दस्तावेजों के सहारे यह पद हासिल किया था। इस मामले में अब महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी ने जिला कलेक्टर को इस पर त्वरित और निष्पक्ष कार्यवाही के निर्देश दिए है । लंबे समय से लंबित इस जांच ने अब जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

पूरा प्रकरण जिला पंचायत धमतरी में नियुक्त एपीओ से जुड़ा है, जिन पर मूलतः बस्तर जिले का निवासी होने के बावजूद फर्जी निवास प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त करने का गंभीर आरोप है। शिकायतकर्ता के अनुसार, वर्ष 2011 में हुई इस भर्ती प्रक्रिया में मुख्य कार्यपालन अधिकारी के आदेश से नियुक्ति तो दे दी गई, लेकिन इसमें प्रस्तुत निवास प्रमाण पत्र के क्रमांक और विवरण पूरी तरह संदिग्ध हैं। सूचना के अधिकार से प्राप्त दस्तावेजों और तहसीलदार बस्तर के आधिकारिक प्रतिवेदन से यह स्पष्ट हुआ है कि जिस प्रकरण क्रमांक का उपयोग प्रमाण पत्र के लिए किया गया, वह राजस्व दायरा पंजी में किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज है। इतना ही नहीं, संबंधित प्रमाण पत्र पर जारी करने की तिथि तक अंकित नहीं है, जो इसकी प्रामाणिकता को सीधे तौर पर चुनौती देता है।

भर्ती नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता ने कहा कि एपीओ पद के लिए छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना अनिवार्य शर्त थी, जबकि संबंधित अधिकारी की अधिकांश शैक्षणिक योग्यताएं मध्य प्रदेश की हैं। धमतरी जिले में कराया गया उनका रोजगार पंजीयन भी जांच के घेरे में है। इस मामले की गूंज छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में भी सुनाई दी थी, जब धमतरी विधायक ओंकार साहू ने सदन में राजस्व और पंचायत विभाग की इन अनियमितताओं को प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने साक्ष्यों के साथ सदन को अवगत कराया कि किस प्रकार प्रशासन संविदा कर्मचारी को बचाने का प्रयास कर रहा है और पुलिस जांच का बहाना बनाकर ठोस कार्यवाही को टाला जा रहा है।

प्रशासनिक स्तर पर कलेक्टर द्वारा गठित जांच दल की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि जांच टीम ने शिकायतकर्ता का बयान लिए बिना ही एक अधूरी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी, जिससे मामले को रफा-दफा कर इतिश्री कर लिया गया । दो वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी किसी निष्कर्ष पर न पहुंच पाना अफसरों के ढुलमुल रवैये को दर्शाता है। इसी उदासीनता से त्रस्त होकर आवेदक ने लोकसभा सांसद रूपकुमारी चौधरी को ज्ञापन सौंपा और जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) की बैठक में शामिल उपरांत इस मुद्दे को लेकर ज्ञापन सौंपा । सांसद ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा को आवेदन प्रेषित कर कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

वर्तमान में यह प्रकरण जिला प्रशासन के लिए साख की लड़ाई बन चुका है। शिकायतकर्ता ने स्पष्ट मांग की है कि मामले की पुनः गहन जांच कर उनका बयान दर्ज किया जाए और कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर संबंधित व्यक्ति को तत्काल पदमुक्त कर धोखाधड़ी व जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया जाए। अब सबकी नजरें कलेक्टर के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वे सांसद के निर्देशों और विधानसभा में उठे सवालों के बाद इस भ्रष्टाचार के मामले में न्यायोचित कार्यवाही करेंगे या अफसरशाही का संरक्षण इस मामले को फिर ठंडे बस्ते में डाल देगा। राजनीतिक समेत अफसरी गलियारों में यह चर्चा आम है कि यदि इस बार भी कार्रवाई नहीं हुई, तो शासन की जीरो टॉलरेंस की नीति पर प्रश्नचिन्ह लगना निश्चित है।

 

 

 

चुनेश साहू 7049466638

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