
कबीरधाम:पंडरिया वार्ड क्रमांक 08 निवासी कुनाल पुरकर की निर्मम हत्या को लेकर अब मामला राज्य स्तर तक पहुंच गया है। साजिशन हत्या के आरोपियों पर जांच व FIR दर्ज नहीं होने से आक्रोशित सतनामी समाज ने पंडरिया बंद कराते हुए थाना घेराव किया। सड़कों पर उतरे हजारों लोगों ने प्रशासन और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इसी क्रम में सतनामी समाज द्वारा छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें हत्या को पूर्व नियोजित साजिश बताया गया है और नामजद आरोपियों पर FIR, तत्काल गिरफ्तारी व CBI जांच की मांग की गई है।
नामजद आरोपी फिर भी खुले, पुलिस पर संरक्षण के आरोप
ज्ञापन में स्पष्ट आरोप लगाया गया है कि दिनांक 21 दिसंबर 2025 को हुई कुनाल पुरकर की हत्या में शामिल सुमित तिवारी और गोलू ठाकुर के विरुद्ध अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की गई। समाज का कहना है कि प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए कबीरधाम पुलिस जानबूझकर कार्रवाई से बच रही है, जिससे पुलिस की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
संदेहियों की गिरफ्तारी नहीं, नार्को टेस्ट भी नहीं जांच पर सवाल
सतनामी समाज ने मांग की है कि,हत्या में गिरफ्तार आरोपियों को पुलिस रिमांड में लिया जाए
सभी आरोपियों व संदिग्धों का नार्को टेस्ट कराया जाए
पूरे मामले की CBI से निष्पक्ष जांच कराई जाए
साथ ही आरोप लगाया गया है कि पंडरिया पुलिस व प्रशासन द्वारा सतनामी समाज के लोगों पर लगातार अत्याचार किया जा रहा है, जिसे तत्काल रोका जाए।
एक और हत्या–अपहरण का मामला भी उजागर
ज्ञापन में मालिक राम बंजारे के 17 दिसंबर 2026 को अपहरण कर हत्या किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। समाज ने इस मामले में भी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। आरोप है कि जिले में अपराध बेलगाम हो चुके हैं और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है।
कबीरधाम पुलिस की छवि को गहरा झटका
लगातार सामने आ रहे हत्या, अपहरण, नशाखोरी और अवैध शराब बिक्री के मामलों ने कबीरधाम पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है
“जब खुलेआम अपराध फल-फूल रहे हों और नामजद आरोपियों पर भी FIR न हो, तो जनता को सड़क पर उतरना ही पड़ेगा।”
चेतावनी: “इंसाफ नहीं तो सरकार नहीं”
सतनामी समाज ने प्रशासन को सीधी चेतावनी दी है कि यदि—
सभी साजिशकर्ता आरोपियों पर FIR
दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी
और निष्पक्ष जांच
जल्द नहीं हुई, तो यह आंदोलन पूरे छत्तीसगढ़ में बंद में तब्दील कर दिया जाएगा।
आंदोलनकारियों ने साफ कहा
“इंसाफ नहीं तो सरकार नहीं।”





