कवर्धा,पंडरिया थाना क्षेत्र में सतनामी समाज के किशोर कुनाल पुरकर की साजिशन हत्या ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पंडरिया में कानून केवल कागजों में जिंदा है। हत्या के इतने दिनों बाद भी न तो आरोपी के मास्टरमाइंड गिरफ्तार नहीं हुए, न SIT बनी, न नार्को टेस्ट हुआ और न ही CBI जांच की कोई पहल—जिससे पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मृतक के पिता राजकुमार पुरकर द्वारा नामजद आरोपियों के खिलाफ शिकायत, पुलिस रिमांड, SIT गठन और उच्चस्तरीय जांच की मांग के बावजूद थाना पंडरिया पूरी तरह निष्क्रिय बना हुआ है। समाज का आरोप है कि पुलिस की यह चुप्पी आरोपियों को खुली छूट देने के बराबर है, जिससे वे खुलेआम घूम रहे हैं और पीड़ित परिवार भय में जीने को मजबूर है।
सतनामी समाज का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी समाज के एक पूर्व प्रमुख व्यक्ति की हत्या हो चुकी है, लेकिन उस मामले में भी दोषियों को सजा नहीं मिली। इससे साफ है कि सतनामी समाज को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
इसी प्रशासनिक नाकामी और न्याय की अनदेखी के खिलाफ 23 जनवरी 2026 को सतनामी समाज द्वारा पंडरिया नगर पूर्णतः बंद रखने का ऐलान किया गया है। इसके साथ ही सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक थाना पंडरिया का घेराव कर उग्र विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। समाज ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आंदोलन चेतावनी नहीं, बल्कि न्याय की आखिरी पुकार है।
सतनामी समाज ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि अब भी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को जिला-स्तर से राज्य-स्तर तक ले जाया जाएगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी पुलिस और जिला प्रशासन की होगी।
अब सवाल यह है कि,क्या पंडरिया पुलिस किसी दबाव में काम कर रही है?
क्या सतनामी समाज को न्याय मांगने के लिए सड़क पर उतरना ही पड़ेगा? या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा?






