
0 क्षेत्र में धुमधाम से बनाया गया छेरछेरा तिहार
गुरूर। छत्तीसगढ़ राज्य की सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं में गहरी जड़ें जमाए हुए कई पर्व और उत्सव हैं, जो न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होते हैं, बल्कि समाज में सामूहिकता, भाईचारे और सामाजिक सहयोग की भावना को भी बढ़ावा देते हैं। इनमें से एक प्रमुख और विशिष्ट पर्व छेरछेरा है। यह पर्व छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति का आदर्श प्रस्तुत करता है और किसानों के जीवन से जुड़ा हुआ है। छेरछेरा पर्व कृषि पर आधारित होने के कारण यह नए कृषि मौसम और फसल कटाई के बाद मनाया जाता है, जिसे षनिवार पौष पूर्णिमा के दिन बड़े धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर प्रेस रिपोर्टर क्लब ब्लाक गुरूर कार्यालय पड़कीभाट में ब्लाक अध्यक्ष रिखीराम साहू ने तिहार का सम्म्मान करते हुए ग्रामीण बच्चों को छेरछरा पर्व पर दान दिया।
प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान और जैव विविधता संरक्षण – रिखीराम साहू
छेरछेरा पर्व पर प्रकाश डालते हुए प्रेस रिपोर्टर क्लब ब्लाक अध्यक्ष गुरूर अध्यक्ष रिखीराम साहू ने कहा किं छेरछेरा पर्व का विशिष्ट रूप और यहां की परंपराएं विशेष महत्व रखती हैं। गांवों में यह पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है, और यह स्थानीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। यहां के बच्चे विशेष रूप से छेरछेरा के दिन हर घर के सामने पहुंचते हैं, और इस दिन उन्हें नया चावल और धन प्राप्त होता है। यह पर्व न केवल कृषि का उत्सव है, बल्कि यह लोकनृत्य, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भी अपनी अहमियत बनाए रखता है। गांवों में छेरछेरा के दौरान नृत्य और गीत की विशेष भूमिका होती है। महिलाएं जहां सुगा गीत गाती हैं, वहीं पुरुष शैला गीत गाकर नृत्य करते हैं। साथ ही युवा वर्ग भी डंडा नृत्य करते हुए घर-घर पहुंचता है। यह नृत्य और गीत स्थानीय परंपराओं और संस्कृति का हिस्सा होते हैं, जो समाज की एकता और विविधता को बढ़ावा देते हैं।
– छेरछेरा पर्व।
-रिपोर्टर —-गगनदीप सिन्हा–7771845128————-हिरदे-सिन्हा–7389867471————————————————–





