
रायपुर। प्रदेश में नक्सल समस्या के समाधान और शांति बहाली की दिशा में सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि पुलिस और प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों के खिलाफ दर्ज मामले समाप्त किए जाएंगे।
इस फैसले को छत्तीसगढ़ सरकार ने “शांति और विकास की नीति” का मुख्य आधार बताते हुए कहा कि हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले युवाओं को समाज में सम्मानजनक तरीके से पुनर्वास का अवसर मिलेगा।
सरकार का संदेश— ‘हिंसा छोड़ें, विकास से जुड़ें’
कैबिनेट ने स्पष्ट किया कि सरकार उन सभी वर्गों को अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है, जो हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन में लौटना चाहते हैं। पिछले वर्षों में सैकड़ों नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिनमें से कई के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे।
सरकार का मानना है कि ऐसे लोगों को नए जीवन की शुरुआत का मौका मिलना चाहिए, जिससे समाज में सकारात्मक वातावरण बन सके।
प्रशासन तैयार करेगी सूची
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पुलिस मुख्यालय आत्मसमर्पित नक्सलियों की सूची तैयार कर उसे सरकार को सौंपेगा। सूची का परीक्षण करने के बाद उनके खिलाफ चल रहे सभी केस औपचारिक रूप से वापस लिए जाएंगे।
विशेष पुनर्वास पैकेज
सूत्रों के अनुसार, सरकार आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए पुनर्वास नीति को और मजबूत बनाने की दिशा में भी काम कर रही है, जिसमें— कौशल विकास प्रशिक्षण , आवास और रोजगार सहायता , वित्तीय अनुदान , शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता जैसी व्यवस्थाएँ शामिल होंगी।
स्थानीय लोगों ने स्वागत किया
आदिवासी बहुल क्षेत्रों में इस निर्णय का व्यापक स्वागत किया जा रहा है। सामाजिक संगठनों ने कहा कि यह कदम लंबे समय से संघर्ष झेल रहे इलाकों में शांति बहाल करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
संवाद व शांति पर जोर
कैबिनेट ने इस बात पर जोर दिया कि हिंसा से विकास प्रभावित होता है। सरकार चाहती है कि संवाद और विश्वास के माध्यम से छत्तीसगढ़ को नक्सल हिंसा से मुक्त किया जाए।





