
रायपुर,
छत्तीसगढ़ सरकार ने रजिस्ट्री कानून में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए बड़ा निर्णय लिया है। अब राज्य में गोद ली हुई पुत्री को भी वही कानूनी अधिकार मिलेगा जो गोद लिए गए पुत्र को मिलता है। सरकार का यह फैसला महिला समानता की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है।
अंग्रेजों के जमाने का कानून बदला
एकात्म परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता में आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने विभाग की दो साल की उपलब्धियों की जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ रजिस्ट्रीकरण अधिनियम-1908 में संशोधन कर 100 साल पुराने कानून में बदलाव किया गया है।
अब तक नियमों में केवल गोद लिए गए पुत्र को ही संपत्ति का अधिकार माना जाता था। लेकिन अब संशोधन के बाद पुत्र और पुत्री दोनों को समान अधिकार प्राप्त होंगे।
महिलाओं को सम्मान देने वाली पहल
मंत्री चौधरी ने कहा कि यह बदलाव छत्तीसगढ़ में नारी सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे गर्भस्थ भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक समस्याओं पर रोक लगाने में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा—। “सरकार की नज़र समाज के कमजोर वर्ग पर है। बेटियों को बराबरी का दर्जा देना हमारा संकल्प है।”
पंजीयन विभाग की उपलब्धियां पिछले दो वर्षों में पंजीयन विभाग ने कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं। 10 नई सुविधाओं की शुरुआत की गई दस्तावेज़ रजिस्ट्री प्रक्रिया सरल और डिजिटल बनी समय की बचत और पारदर्शिता में वृद्धि
जनता में खुशी
कानून संशोधन के इस ऐतिहासिक फैसले का आम जनता और सामाजिक संस्थाओं ने स्वागत किया है। लोगों ने कहा कि इस बदलाव से परिवारों में बेटियों की भूमिका और सम्मान बढ़ेगा
छत्तीसगढ़ सरकार का यह फैसला राज्य में लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न सिर्फ बेटियों का सम्मान बढ़ेगा, बल्कि समाज में समान अधिकार वाली सोच को नई दिशा मिलेगी।





