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कवर्धा में दो इंडियन बायसन का करंट लगाकर शिकार पांच आरोपी गिरफ्तार, वन विभाग में हड़कंप 

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वन्यजीवों की सुरक्षा दांव पर

कवर्धा जिले के जंगलों से एक बेहद चिंताजनक और दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रदेश में वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दो दुर्लभ इंडियन बायसन—जिन्हें गौर भी कहा जाता है—को शिकारियों ने विद्युत करंट का सहारा लेकर मौत के घाट उतार दिया। यह कृत्य जहां कानून के विरुद्ध है वहीं जंगल के पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी एक बड़ा खतरा माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने बायसन के आवागमन वाले क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से बिजली के तार बिछाए थे। इन तारों में सीधे लाइन से विद्युत करंट प्रवाहित किया गया, ताकि जंगल की गहराई में घूमने वाले गौर जैसे भारी-भरकम जानवर आसानी से शिकार बन जाएं। जैसे ही दो बायसन उस क्षेत्र में पहुंचे, तेज विद्युत प्रवाह से उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

घटना का खुलासा ऐसे हुआ

स्थानीय ग्रामीणों को सुबह जंगल किनारे संदिग्ध हलचल नजर आई। उन्होंने इसके बाद तुरंत इसकी सूचना निकटतम वन विभाग को दी। वन अमले की टीम मौके पर पहुंची तो वहां गंभीर स्थिति देखकर अधिकारी भी स्तब्ध रह गए। मौके से दोनों बायसन के अवशेष बरामद किए गए, जिनमें साफ दिखाई दे रहा था कि घटना के बाद जानवरों के शरीर को काटकर मांस अलग किया गया है।

जांच में जुटी टीम ने ग्रामीणों के बयान और मौके पर मिले सबूतों के आधार पर पांच संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपराध स्वीकारते हुए बताया कि उन्होंने मांस को टुकड़ों में काटकर आपस में बांट लिया था और बाकी निशान मिटाने की कोशिश कर रहे थे।

वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते ही वन विभाग ने पुलिस के साथ संयुक्त अभियान चलाते हुए सबूत और हथियार (करंट वायरिंग सहित) जब्त किए। आरोपियों के कब्जे से मांस के कुछ हिस्से भी बरामद हुए हैं, जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

वन विभाग ने पूरे क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है और आसपास के गांवों में शिकार विरोधी टीमों को सक्रिय कर दिया गया है।

कठोर कार्रवाई की तैयारी

इस घटना को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत गंभीर अपराध माना जाता है, जिसके लिए 7 वर्ष तक की सख्त सजा और आर्थिक दंड दोनों का प्रावधान है। विभाग का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति ऐसी हरकत करने से पहले कई बार सोचने को मजबूर हो।

स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश

गौर की हत्या की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस घटना को जंगल की सुरक्षा प्रणाली पर बड़ा आघात बताया है। लोगों ने मांग की है कि जंगल की चौकसी बढ़ाई जाए और बिजली फैलाकर शिकार करने जैसी घटनाओं पर तत्काल रोक लगाई जाए।

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि गौर जैसे मजबूत एवं दुर्लभ प्राणी का इस तरह शिकार होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे न सिर्फ वन्यजीवों की संख्या घटती है बल्कि जंगल का पूरा खाद्य-श्रृंखला संतुलन भी प्रभावित होता है।

विशेषज्ञों ने यह भी चेताया कि विद्युत करंट से शिकार करना एक संगठित अवैध गिरोह की ओर संकेत करता है, जिसकी जड़ें कई गांवों और बाजारों तक फैली हो सकती हैं। ऐसे नेटवर्क का पता लगाना भी वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती है।

निष्कर्ष : जंगलों की रक्षा अब सबसे बड़ी जरूरत

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं हैं।

ज़रूरी है— कड़ी निगरानी, जनजागरण, त्वरित कार्रवाई और ग्रामीणों की भागीदारी।

इंडियन बायसन जैसे दुर्लभ और संरक्षित जीवों का अस्तित्व हमारे जंगलों का गौरव है, और इन्हें बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी भी।

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