
रायपुर, गुरुवार
रायपुर के सेजबहार इलाके में स्थित सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज (GEC) परिसर में निर्माणाधीन बिल्डिंग से जुड़े एक दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुधवार दोपहर काम के दौरान ऊँचाई से गिरने से एक महिला मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद साथ काम कर रहे मजदूरों और स्थानीय लोगों में गुस्सा और आक्रोश साफ नजर आया।
हादसा कैसे हुआ? प्रत्यक्षदर्शियों ने बताई घटनास्थल की पूरी कहानी
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मृतक महिला मजदूर इमारत के ऊपरी हिस्से में मटेरियल शिफ्ट करने का काम कर रही थी। इस दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे गिर पड़ी। बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर वह काम कर रही थी, वहां पर्याप्त सुरक्षा इंतज़ाम जैसे—सुरक्षा बेल्ट, किनारों पर घेरा, अथवा सेफ्टी नेट—उपलब्ध नहीं थे।
मजदूर साथियों के अनुसार, कई दिनों से ठेकेदार से सुरक्षा उपकरणों की मांग की जा रही थी, लेकिन इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
हादसे के बाद निर्माण स्थल पर अफरा–तफरी
महिला के गिरते ही मौके पर हड़कंप मच गया। साथी मजदूरों ने उसे तुरंत नीचे पहुंचाया और एंबुलेंस बुलाने की कोशिश की, लेकिन गंभीर चोट लगने के कारण उसने वहीं दम तोड़ दिया।
घटना के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया और पुलिस को सूचना दी गई। सेजबहार थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा तैयार किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर उठे सवाल
यह पहली बार नहीं है जब निर्माणाधीन सरकारी परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप लगे हों। मजदूरों ने शिकायत की है कि—
• साइट पर हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, ग्लव्स और जूते की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होती।
• ऊँचाई पर काम करने वाले मजदूरों को बुनियादी सुरक्षा प्रशिक्षण तक नहीं दिया जाता।
• मजदूरों की उपस्थिति रजिस्टर और स्वास्थ्य जांच भी अक्सर औपचारिकता बनकर रह जाती है।
स्थानीय संगठनों ने कहा कि सरकारी परियोजना होने के बावजूद कार्यस्थल पर सुरक्षा का स्तर बेहद कमजोर है, जो सीधे तौर पर मजदूरों की जान के साथ खिलवाड़ है।
प्रशासन की कार्रवाई: जाँच समिति गठित, ठेकेदार से पूछताछ
हादसे के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल जांच के आदेश दे दिए हैं। जानकारी के अनुसार—
लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीम ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया।
ठेकेदार और साइट इंजीनियर से प्रारंभिक पूछताछ की गई।
जिम्मेदारी तय होने पर संबंधित व्यक्तियों पर कार्रवाई की बात कही गई है।
पुलिस ने भी धारा 174 के तहत मामले को दर्ज कर लिया है और आगे जांच जारी है।
मजदूरों की मांग—सुरक्षा उपकरण अनिवार्य किए जाएं, परिवार को मुआवजा मिले
हादसे के बाद मजदूरों ने मृतक महिला के परिवार के लिए उचित मुआवजे की मांग की है। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निर्माण स्थलों पर सख्त सुरक्षा मानक लागू करने पर जोर दिया है।
राज्य के मजदूर संगठन ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कहा
“सरकारी परियोजनाओं में काम करने वाले मजदूर सुरक्षित हों, यह सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। सुरक्षा की अनदेखी के कारण एक महिला की जान चली गई—इस पर ठोस कार्रवाई जरूरी है।”
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतक महिला मूल रूप से मजदूरी कर परिवार चलाती थी। उसके जाने के बाद घर में पति और तीन छोटे बच्चे हैं, जिनकी जिम्मेदारी अब परिवार पर भारी संकट बनकर टूट पड़ी है। परिजन रो-रोकर अपनी व्यथा सुना रहे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं।
निष्कर्ष—क्या सुधरेंगे निर्माण स्थलों के हालात?
यह हादसा एक बार फिर दिखाता है कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा उपकरण और सुरक्षा प्रोटोकॉल सिर्फ कागज़ों में सीमित रह जाते हैं। सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज जैसी महत्वपूर्ण परियोजना में भी सुरक्षा मानकों का पालन न होना अत्यंत गंभीर लापरवाही है।
अब देखना होगा कि प्रशासन की जांच कितनी सार्थक साबित होती है और क्या भविष्य में मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।





