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धमतरी/। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के नाम पर करोड़ों रुपये की सड़कें बनाई गईं, लेकिन गुणवत्ता की पोल महीनों में खुल गई। धमतरी ब्लॉक के महानदी मुख्य नहर किनारे बने मार्ग और पुल अब मौत का जाल बन चुके हैं। रुद्री से सांकरा (छाती) तक 12 किमी सड़क तीन साल में ही ध्वस्त हो गईं। टूटी रेलिंग, तालाबनुमा गड्ढे, उखड़ी डामर और भारी गंदगी से ग्रामीणों का जन जीवन खतरे में है, लेकिन बांध प्रबंधन, पीएमजीएसवाई विभाग और ठेकेदार मिलकर लापरवाही का खेल खेल रहे हैं।

महानदी मुख्य नहर पार करने वाले सांकरा,, कोलियारी, शंकरदाह, बोड़रा, पुरी और छाती गांवों के वर्षों पुराने वृहत पुलों की रेलिंग जगह-जगह टूटकर सड़क पर बिखरी पड़ी है। पुलों के बीच रिक्त स्थान से दिन-रात गिरने का खतरा बना हुआ है। बारिश या सिंचाई के दौरान नहर में तेज बहाव और गहराई को देखते हुए छोटे बच्चे या अंधेरे में चलने वाले किसी के भी नहर में समा जाने की आशंका है। यह मार्ग नगरी से रायपुर का बायपास है, जो धमतरी ट्रैफिक कम करता है और हजारों ग्रामीणों-किसानों की जीवनरेखा है।

लेकिन 2021 में 12 करोड़ 10 लाख से बनी रुद्री-सांकरा सड़क अब जर्जर हो चुकी है। डामर गायब, गिट्टी बिखरी और अनगिनत गड्ढे दुर्घटना को आमंत्रण दे रहे हैं।
इसी तरह भखारा में छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क योजना की तीन किमी सड़क जनवरी में कार्यादेश के मात्र पांच महीने बाद ध्वस्त हो गई। 46 लाख से अधिक की लागत वाली यह सड़क ठेकेदार की मेहरबानी और विभाग की उदासीनता का शिकार बनी। अनुबंधित अवधि में मरम्मत तक नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि शोल्डर नहीं बने, मोटाई मानकों की अनदेखी हुई और अधिकारी-ठेकेदार की मिलीभगत से नियम ताक पर रखे गए।
जनपद सदस्य पिंकू जागेंद्र साहू ने एक साल पहले रुद्री-सांकरा मार्ग की शिकायत की, लेकिन विभाग ने कुछ जगहों गढ्डों में थूकपालिस खानापूर्ति कर ली। कोलियारी से सांकरा पुल तक रेलिंग का मलबा बिखरा है।
नहर किनारे मुर्गी पंख, कचरा और दुर्गंध से स्वास्थ्य संबंधी अनेक समस्याएं बढ़ रही हैं। 2018 में 6 करोड़ से बने 13 किमी नहर पथ का भी यही हश्र है। प्रतिबंध के बावजूद भारी वाहनों से क्षति हो रही है।

ग्रामीणों में बताया कि कलेक्टर और मुख्यमंत्री से शिकायत की, मगर कोई कार्रवाई नहीं। पीएमजीएसवाई मुखिया इतने व्यस्त है कि कलेक्टर साहब को भी मात देने का ढोंग रचते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कामों में नजर नहीं आते।
जिला कलेक्टर अबिनाश मिश्रा डोकाल-कमार पारा सड़क का निरीक्षण कर गुणवत्ता की बात करते हैं, लेकिन विभाग कथित भ्रष्टाचार का खेल खेल रहा है।
बहरहाल देखना होगा अब क्या तालाब नुमा गड्ढे को भरा जाता है, बची खुची सड़क भी लापरवाही का भेंट चढ़ जाता है।
चुनेश साहू 7049466638





