
अवैध रेत खनन का कहर: अमेठी रेत खदान में माफियाओं के चाकू की नोक और नेताओं की चुप्पी से बर्बाद हो रही धरती और सड़कें
धमतरी — जिले में अवैध रेत खनन का काला कारोबार चरम पर पहुंच चुका है, जहां माफिया चाकू की नोक पर वसूली कर रहे हैं और स्थानीय सड़कें अपनी अंतिम सांसें गिन रही हैं। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, अमेठी रेत खदान से एक ही दिन में 150 से 200 ट्रैक्टर रेत निकाली जा रही है, और हर ट्रैक्टर से 300 रुपये की अवैध वसूली हो रही है। यह खदान ग्राम विकास समिति से ठेकेदार ने महज 80,000 रुपये प्रति माह के हिसाब से ली है, लेकिन वास्तविक कमाई लाखों में पहुंच रही है,
यह वही खदान है जहां कुछ महीनों पहले स्थानीय विधायक ने स्वयं मौके पर पहुंचकर अवैध खनन और परिवहन पर रोक लगाने के लिए खनिज विभाग को सख्त निर्देश दिए थे। लेकिन वह दस्तक महज एक दिखावा साबित हुई। उसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के नेता गायब हो गए, मानो इस काले धंधे से उनका कोई वास्ता ही न हो। सूत्र बताते हैं कि माफिया अब बंदूकबाजों की मदद से बेखौफ होकर काम कर रहे हैं। खनिज विभाग ने रैंप रोड की कटाई कर रोक लगाने की कोशिश की, लेकिन माफिया ने रैंप को दोबारा बनाकर खनन और परिवहन फिर से शुरू कर दिया। यह न केवल कलेक्टर के सख्त आदेशों की धज्जियां उड़ा रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी अपूरणीय क्षति पहुंचा रहा है।
कोलियरी खरेंगा-दोनर मार्ग, जो पहले से ही निर्माणाधीन है, इन रेत माफियाओं के ट्रैक्टरों के कारण अति जर्जर हो चुका है। सड़क पर गड्ढे इतने गहरे हो गए हैं कि वाहन चलाना जानलेवा बन गया है। निर्माणाधीन यह सड़क अपनी अंतिम सांसें गिन रही है, लेकिन माफिया जोर-शोर से अपना धंधा चला रहे हैं, बिना किसी रोक-टोक के। स्थानीय निवासियों का कहना है कि रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टरों की आवाजाही से धूल, बारिश में कीचड़ और प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ गया है कि सांस लेना दूभर हो रहा है। बच्चे स्कूल जाने से डरते हैं, क्योंकि सड़क पर ट्रैक्टरों की रफ्तार जानलेवा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, अनियंत्रित रेत खनन से नदी तटों का कटाव बढ़ रहा है, जिससे बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है और जल स्रोत सूख रहे हैं।
यह अवैध कारोबार न केवल सरकारी राजस्व को चूना लगा रहा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बर्बाद कर रहा है। ग्राम विकास समिति के नाम पर ली गई खदान का ठेका महज एक आवरण है, जबकि असली कमाई माफियाओं की जेब में जा रही है।

चाकू की नोक पर वसूली से ट्रैक्टर चालक डरे हुए हैं, लेकिन मजबूरी में काम कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि विभागीय अधिकारी भी इस सांठ-गांठ में शामिल हैं, क्योंकि बार-बार की शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। विधायक की एक बार की दस्तक के बाद सब कुछ भुला दिया गया, जो राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी को दर्शाता है। विपक्ष भी चुप है, शायद इसलिए कि इस धंधे से सभी को फायदा पहुंच रहा है।

स्थानीय लोगों में आक्रोश पनप रहा है। एक निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, हमारी सड़कें टूट रही हैं, नदियां सूख रही हैं, और माफिया बंदूकें लेकर घूम रहे हैं। कहां है शासन प्रशासन?
यह अवैध खनन का काला अध्याय न केवल विकास को रोक रहा है, बल्कि समाज को अपराध की गर्त में धकेल रहा है।
ब्यूरो रिपोर्ट





