
@अजय जांगड़े
कवर्धा/पंडरिया।छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में स्थित लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल शक्कर कारखाना इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में है और इस बार कारण बेहद गंभीर है। जहां एक ओर राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह आगामी 6 जुलाई को पंडरिया दौरे पर आने वाले हैं, वहीं दूसरी ओर कारखाने की बदहाल व्यवस्था और श्रमिकों के साथ हो रहा अन्याय सरकार की छवि पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
8 महीने से नहीं मिला मजदूरों को वेतन, परिवारों पर टूटा संकट का पहाड़
कारखाने में कार्यरत सैकड़ों श्रमिकों को बीते 8 माह से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। इसके चलते उनके घरों में रोज़ी-रोटी का संकट गहराता जा रहा है। बच्चों की पढ़ाई, परिवार की जरूरतें और इलाज जैसी मूलभूत सुविधाएं भी अब प्रभावित हो रही हैं। कई मजदूर कर्ज में डूब चुके हैं, तो कुछ ने दूसरे जिलों की ओर पलायन करना शुरू कर दिया है।
भ्रष्टाचार की बू, प्रबंध संचालक पर गंभीर आरोप
स्थानीय श्रमिक संगठनों और नागरिकों का कहना है कि कारखाने की वर्तमान स्थिति सिर्फ वित्तीय तंगी की नहीं बल्कि खुली भ्रष्टाचार की देन है। प्रबंध संचालक (एम.डी.) पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं। उनका कार्यकाल शुरू होने के बाद से ही कारखाने में वित्तीय पारदर्शिता और संचालन को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
कई लोगों का यह भी कहना है कि कारखाने के एम.डी. के कार्यकाल की स्वतंत्र जांच कराई जाए, जिससे तमाम घोटाले और वित्तीय गड़बड़ियों का पर्दाफाश किया जा सके।
सोशल मीडिया बना विरोध का मंच, जनता का फूटा गुस्सा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पंडरिया आगमन की घोषणा होते ही सोशल मीडिया पर
शक्कर कारखाना वेतन दो, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई हो,जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे हैं।
पंडरिया के युवाओं, बुद्धिजीवियों और श्रमिकों के परिजनों ने सोशल मीडिया को अपना मंच बनाकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। वीडियो, पोस्ट और टिप्पणियों में मुख्यमंत्री से इस मुद्दे को गंभीरता से लेने की अपील की जा रही है।
कांग्रेस का एलान है सीएम के सामने करेंगे प्रदर्शन, भाजपा शासन को बताया “शर्मनाक”
प्रदेश कांग्रेस ने भी इस मामले में मोर्चा संभालते हुए मुख्यमंत्री के पंडरिया दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। पार्टी नेताओं ने कहा है कि श्रमिकों का 8 महीने से वेतन न मिलना न केवल मानवाधिकारों का हनन है, बल्कि यह भाजपा शासन की असंवेदनशीलता और कुप्रबंधन का उदाहरण भी है।
कांग्रेस के स्थानीय पदाधिकारियों ने कहा, “यह शर्म की बात है कि भाजपा शासन में एक सरकारी कारखाने में मजदूरों को महीनों तक वेतन नसीब नहीं हो रहा। यह जनता से विश्वासघात है। मुख्यमंत्री को इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाना होगा।
जनता के मन में सवाल – क्या सीएम को पहली ही यात्रा में झेलनी पड़ेगी शर्मिंदगी?
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह पहला पंडरिया दौरा है, लेकिन जिस तरह से मामला तूल पकड़ रहा है, उसे देखते हुए सवाल उठ रहे हैं कि क्या उन्हें जनता के विरोध और श्रमिकों के रोष का सामना करना पड़ेगा? लोगों का कहना है कि यदि सरकार ने तत्काल कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो मुख्यमंत्री का दौरा विरोध और नाराजगी की छाया में डूब सकता है।
जनता और संगठन की मांग – प्रबंध संचालक को हटाएं, भुगतान हो तत्काल
श्रमिक संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम जनता ने सरकार से मांग की है कि शक्कर कारखाना के प्रबंध संचालक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और श्रमिकों को जल्द से जल्द उनका बकाया वेतन भुगतान किया जाए। साथ ही, कारखाने की समग्र स्थिति की सीबीआई या उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि वास्तविकता सामने आ सके।
यदि नहीं हुई कार्रवाई, तो उग्र आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि मुख्यमंत्री के दौरे तक इस विषय पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे। “विकास” के नारों के बीच, श्रमिकों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं होगी, यह स्वर अब जनता के बीच गूंजने लगा है।
अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री अपने दौरे के दौरान इस गंभीर मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या पंडरिया के मजदूरों को उनका हक मिल पाएगा या फिर यह मामला भी राजनीति की धूल में दब जाएगा।





