
@अजय जांगड़े
कवर्धा : कबीरधाम जिले ही नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में भी अपराध पढ़ रही चाहे वह कवर्धा जिला के ग्राम लोहारीडीह हों या बलौदा बाजार में घटित आगजनी की वारदात हो। कहीं न कहीं पुलिस प्रशासन की गलती नजर आ रही जिसे किसी भी तरह से नजर अंदाज नहीं किया जा सकता।
वास्तविक रूप से दोषी को सजा न देते हुए निर्दोष लोगों को जेल में ठूंस ठूंस भर उनके खिलाफ़ ब्रिटिश हुकूमत की तरह व्यवहार किया जा रहा है जो प्रदेश के वर्तमान सरकार पर सवालिया बना हुआ है जो कहीं न कहीं और किसी न किसी रूप में इस सत्ता सीन सरकार को नकारा जा रहा है।
भारत देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को डगमगाने सरीखा ऐसा प्रशासनिक कृत्य शोभनीय नही है।
जहां पर एक पुलिस अधिकारी स्वयं खड़ा हो किसी महिला को अनेक लाठियों की वार कराते हैं तो वहीं पुलिस के जवान के भी द्वारा महिलाओं को थाना व जेल में रिमांड लेकर असहनीय पीड़ा दायक मार करते हुए उन्हें बेहोश कर दिया जाता है।
अभिरक्षा में युवा सुशांत साहू का असहनीय मार से मृत्यु हो जाना इस कृत्य वास्तविक प्रमाण है।
लोहारीडीह की यह तीसरी मौत थी जो सबसे और सबके क्या हिन्दू, मुसलमान, सिख, ईसाई आदि मानव समाज की रूह कांप उठी जब यह घटना घटित हुई।
वक्त की घड़ी कुछ इस तरह चलने लगी मानो सरकार की व्यवस्था हुकूमत की अलावा और कुछ नहीं चाह रही है।
आखिर क्यों ऐसा व्यवस्था है जहां राम नाम की जाप होती है तो वही लक्ष्मी, सरस्वती मां दुर्गा आदि शक्तियों का पूजा होता उस देश, राज्य में बेटियां भी कहीं सुरक्षित नजर नहीं आ रही है ये विडंबना नही है तो और क्या है।
राजनीति सरगर्मी भी बढ़ी हुई है जो अपने अपने तौर तरीके से इस तरह की होने वाले घटनाओं का निंदा सरकार की व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए कहते नजर आ रहे हैं।
सरकार आती हैं जाती हैं जनता अपने विवेक से उन्हें अपने मुखिया के रूप चुनते हैं, पर क्या उस चुने हुए मुखिया से इस तरह से होने वाली घटना का उम्मीद किया जा सकता है।
10 लाख,20 लाख दे देने से क्या प्रशासन की लापरवाही व सितम के चलते जानें चली गई उसका भरपाई हो सकेगा।
सत्तासीन और समाज के चम्मच लोगों को चाहिए सत्ता की तलवे चाटने के बजाय समाज हित व सामाजिक व्यवस्था पर कार्य करें जिससे समाज के साथ देश का विकास हो सके।





