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नहर लाइनिंग में भ्रष्टाचार का अंबार: गुणवत्ता दरकिनार, पंडरिया जल संसाधन विभाग पर उठे गंभीर सवाल करोड़ों की परियोजना में नियमों की अनदेखी, निर्माण कार्यों में मिलीभगत के आरोप

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पंडरिया। प्रदेश सरकार भले ही विकास कार्यों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर कई विभागों की कार्यप्रणाली इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। पंडरिया जल संसाधन विभाग इन दिनों एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। करोड़ों रुपए की लागत से चल रहे नहर लाइनिंग और रीमॉडलिंग कार्य में भारी अनियमितता, गुणवत्ताहीन निर्माण और विभागीय मिलीभगत के आरोप सामने आए हैं।

किसान कांग्रेस प्रदेश सचिव अतुल बरगाह ने विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में शासन के तय मापदंडों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। आरोप है कि विभागीय संरक्षण में ठेकेदार द्वारा घटिया सामग्री का उपयोग कर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे बैठे हैं।

जानकारी के अनुसार पंडरिया विकासखंड अंतर्गत क्रांति जलाशय में केआरडी 2310 मीटर से आरडी 7530 मीटर तक रीमॉडलिंग, लाइनिंग एवं 6 नग फॉल कम वीआरसी तथा 1 नग वीआरसी निर्माण कार्य कराया जा रहा है। यह कार्य ग्रुप क्रमांक-06 के अंतर्गत स्वीकृत है। विभागीय दस्तावेजों के अनुसार उक्त निर्माण कार्य का अनुबंध क्रमांक 06/डीएल/28.10.2024 है तथा इसकी कुल लागत लगभग 288.11 लाख रुपए बताई जा रही है। निर्माण कार्य बिलासपुर के मगरपारा निवासी अ वर्ग ठेकेदार अच्छेलाल अग्रवाल द्वारा कराया जा रहा है।

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि कार्यस्थल पर लगाए गए सूचना बोर्ड में निर्माण प्रारंभ होने की तिथि तो अंकित की गई है, लेकिन कार्य पूर्ण होने की तिथि और समय-सीमा का कहीं उल्लेख नहीं किया गया है। इसे लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब निर्माण अवधि ही सार्वजनिक नहीं की गई तो कार्य की गुणवत्ता, प्रगति और जवाबदेही का निर्धारण कैसे होगा।

किसान कांग्रेस प्रदेश सचिव अतुल बरगाह ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में सीमेंट-कंक्रीट ढलाई निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं की जा रही है। लोहे की छड़ों के बीच आवश्यक दूरी का पालन नहीं हो रहा और निर्माण प्रक्रिया में तकनीकी मापदंडों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि शुरुआत से ही इस तरह लापरवाही बरती जाएगी तो करोड़ों की लागत से बन रही यह परियोजना भविष्य में किसानों के लिए राहत नहीं बल्कि परेशानी का कारण बन सकती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में कई जगहों पर जल्दबाजी साफ दिखाई दे रही है। नहर की दीवारों और लाइनिंग में गुणवत्ता की कमी नजर आ रही है। आरोप यह भी है कि कार्य स्थल पर पर्याप्त तकनीकी निगरानी नहीं की जा रही, जिससे ठेकेदार मनमानी तरीके से काम कर रहा है।

सबसे गंभीर सवाल विभागीय अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) और संबंधित इंजीनियरों की भूमिका को लेकर उठ रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि जिम्मेदार अधिकारी अपने निरीक्षण और निगरानी की जिम्मेदारी निभाने के बजाय ठेकेदार को खुली छूट दे रहे हैं। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि शासकीय धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना जाएगा।

सूत्रों के अनुसार संबंधित इंजीनियर डड़सेना का ससुराल पंडरिया क्षेत्र में बताया जा रहा है। इसे लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि कहीं स्थानीय संबंधों और प्रभाव का फायदा उठाकर निर्माण कार्यों में मनमानी तो नहीं की जा रही। हालांकि इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन चर्चाओं ने विभागीय कार्यप्रणाली पर संदेह जरूर खड़ा कर दिया है।

ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि पंडरिया जल संसाधन विभाग के अंतर्गत चल रहे कई अन्य निर्माण कार्यों में भी इसी प्रकार की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में सवाल केवल एक परियोजना तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर उठ रहे हैं।

इस मामले में जब विभागीय अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा,

“ठेकेदार द्वारा तोड़कर बनाया जा रहा है। बड़े काम में छोटी-मोटी गड़बड़ी आ ही जाती है।”

एसडीओ का यह बयान सामने आने के बाद लोगों में और नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपए की लागत वाले निर्माण कार्य में यदि जिम्मेदार अधिकारी स्वयं “छोटी-मोटी गड़बड़ी” को सामान्य बता रहे हैं, तो इससे विभाग की गंभीरता और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब क्षेत्रवासियों की निगाहें जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन पर टिकी हुई हैं। लोगों की मांग है कि पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, गुणवत्ता परीक्षण कराया जाए और यदि अनियमितता पाई जाती है तो दोषी अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यह मामला बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का रूप ले सकता है। वहीं किसान और ग्रामीण अब यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर विकास कार्यों के नाम पर खर्च हो रही करोड़ों की राशि का वास्तविक लाभ जनता को मिलेगा या फिर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा।

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