
सक्ती।
हादसे को लेकर श्रमिक संगठनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। इसी कड़ी में भारतीय मजदूर संघ (BMS) के प्रतिनिधि वेदांता प्लांट पहुंचे और प्लांट प्रबंधन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
प्लांट के मुख्य द्वार के सामने बड़ी संख्या में एकत्रित मजदूरों और संगठन के पदाधिकारियों ने प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्लांट प्रबंधन की लापरवाही के चलते यह गंभीर हादसा हुआ है, जिसमें कई श्रमिकों की जान चली गई और कई घायल हुए हैं।
भारतीय मजदूर संघ के प्रतिनिधियों ने मृतक श्रमिकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की है। इसके साथ ही घायलों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की भी मांग रखी गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल मुआवजा ही नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इस दौरान भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय मंत्री राधेश्याम जायसवाल ने प्लांट प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि हादसा कोई संयोग नहीं बल्कि लापरवाही का परिणाम है। उनके अनुसार प्लांट में बॉयलर को उसकी निर्धारित क्षमता से अधिक लोड पर चलाया जा रहा था, जो सुरक्षा मानकों का सीधा उल्लंघन है।
राधेश्याम जायसवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी बॉयलर का लोड बिना बॉयलर इंस्पेक्टर की अनुमति और हस्ताक्षर के नहीं बढ़ाया जा सकता। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसके निर्देश पर क्षमता से अधिक संचालन किया जा रहा था। उन्होंने बॉयलर इंस्पेक्टर की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। वहीं प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर बनाए रखी जा रही है और सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है।
गौरतलब है कि इस हादसे ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन और प्लांट प्रबंधन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और पीड़ित परिवारों को कब तक न्याय मिल पाता है।





