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कानून बड़ा या जुआ माफिया? पंडरिया में अवैध जुए का साम्राज्य, ‘बैठकी’ वसूली से लेकर दिनदहाड़े खुलेआम जुआ…भाजपा सरकार भी सुस्त 

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पुलिस अधीक्षक इनाम घोषित कीजिए असफलता पर सफलता का है राज, ड्रोन का करें उपयोग तो मिल सकता है सफलता

कवर्धा। पंडरिया शहर में अवैध जुए का जाल इस हद तक फैल चुका है कि यह अब कानून-व्यवस्था, पुलिस प्रशासन और शासन की साख पर सीधी चोट बन गया है। सत्ता बदली, नेता बदले, लेकिन जुआ माफियाओं की पकड़ पहले जैसी ही बरकरार है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कांग्रेस शासन में कमीशन की चर्चा थी और अब भाजपा शासन में भी वही खेल जारी है।

जुआ खेलने वाले क्षेत्र

बेंद्रीचुआ गांव, केशली गोड़ान, बीरकोना, कुशालबंद पारा और बम्हदई मंदिर के आसपास की रोपित वनभूमि तक—कई स्थान देर रात जुआ अड्डों के रूप में सक्रिय हो चुके हैं। असामाजिक तत्वों की रातभर आवाजाही और संदिग्ध गतिविधियों की बढ़ोतरी से कई क्षेत्रों में तनावपूर्ण वातावरण बन गया है।

दिन में भी खुलेआम जुआ, कानून व्यवस्था को खुली चुनौती वहीं जुआ माफियाओं ने 5 किलोमीटर पहले ही दूरियों मे अपने मुखबिर बैठा लिए रखते हैं जिसके चलते नाकाम होती रहती है पकड़ पाने में पुलिस लेकिन सवाल यह भी है कि जुआ माफिया बड़ा है या प्रशासन ? जो इनके चक्रव्यूह को तोड़ नहीं पा रही है।

सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि पंडरिया में अब जुआ केवल रात का खेल नहीं रहा।

दिन के उजाले में भी कई स्थानों पर खुलेआम जुआ संचालित हो रहा है,बेंद्रीचुआ क्षेत्र,केशली गोड़ान,बीरकोना,कुशालबंद पारा के खेत। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब दोपहर में खुलेआम जुआ चल रहा है और पुलिस की मौजूदगी शून्य है, तो रात में किसी भी कार्रवाई की उम्मीद व्यर्थ है। “जुआ अब 24 घंटे चलने वाला कारोबार बन चुका है, पुलिस सिर्फ कागज़ों में सक्रिय दिखाई देती है।”

“पुलिस को सेटिंग के लिए पैसे जाते हैं”—हार चुके खिलाड़ी का बड़ा खुलासा

एक हारे हुए जुआरी ने बताया कि जुआ संचालक खिलाड़ियों से प्रति व्यक्ति 200 से 300 रुपए बैठकी शुल्क वसूलते हैं और इसका हवाला पुलिस से सेटिंग के लिए दिया जाता है।

हालाँकि पुलिस इस बात से पूरी तरह अनभिज्ञता जताती है, लेकिन नागरिकों का संदेह और आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।रोज़ाना लाखों की कमाई—संरक्षण पर गंभीर सवालजुआ नेटवर्क की दैनिक कमाई लाखों रुपए तक पहुंच चुकी है।

इतनी भारी रकम का अवैध कारोबार बिना संरक्षण के संभव नहीं माना जा रहा।शहर में चर्चा है कि कुछ शासकीय कर्मचारियों, दलालों और राजनीतिक रसूखदारों का सहयोग इस नेटवर्क को मजबूत बनाए हुए है।

पुलिस कागज़ी कार्रवाई में व्यस्त, मैदान में जुआ नेटवर्क और मजबूत।

अड्डे बदलने की रणनीति—पुलिस पहुंचते ही अड्डा गायब

जुआ माफिया इतने संगठित हैं कि पुलिस की आहट मिलते ही कुछ ही मिनटों में पूरा अड्डा खाली हो जाता है।हर रात , दिन एक नए स्थान पर जुआ संचालन की रणनीति अपनाई जाती है

रात के समय संदिग्ध गतिविधियों की आवाजाही ने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ बढ़ा दी हैं।

शहरवासी परेशान—“अब कोई कोना सुरक्षित नहीं”

जुआ नेटवर्क के कारण—अपराधों में तेजी,नशाखोरी का बढ़ता प्रचलन,सूदखोरी का विस्तार,उधारी विवाद और झगड़े जिससे परिवार आर्थिक बर्बादी की कगार पर आ जा रहा है।

नागरिकों का कहना है—“पंडरिया अब जुआ माफियाओं के शिकंजे में पूरी तरह जकड़ चुका है।

हारे हुए खिलाड़ी के बताए अनुसार सूदखोर प्रतिदिन 5 लाख रुपए से अधिक नकद लेकर जुआ अड्डों पर पहुंचते हैं। इस पर—10% दैनिक ब्याज,10% चक्री रकम,और 200–300 रुपए बैठकी शुल्क

वसूला जाता है।यही कारण है कि कई खिलाड़ी कर्ज में डूबते जा रहे हैं और परिवार आर्थिक रूप से टूट चुके हैं।

प्रशासन की चुप्पी—लापरवाही या अदृश्य संरक्षण?

जब पूरा शहर अवैध जुआ गतिविधियों की जानकारी रखता है, तो सवाल यह है कि प्रशासन और पुलिस आख़िर किसका इंतजार कर रही है? क्या यह सामान्य लापरवाही है या फिर किसी अदृश्य संरक्षण के कारण कार्रवाई रुकी हुई है?

यही चर्चा अब पंडरिया की सबसे बड़ी बहस बन चुकी है जो कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती दे रहा है।स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और व्यावसायिक संगठनों ने जिला प्रशासन एवं पुलिस के उच्चाधिकारियों से तत्काल कठोर कार्रवाई की मांग की है।जुआ संचालकों, सूदखोरों और उनके संरक्षणकर्ताओं पर सख्त कार्रवाई किए बिना इस बढ़ते अवैध साम्राज्य पर रोक लगाना असंभव है।

लोगों का कहना है“यदि हालात ऐसे ही रहे, तो पंडरिया प्रदेश का नया अपराध केंद्र बनकर उभरेगा।”

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