
कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और संस्कृति की पहचान है : भावना बोहरा
कवर्धा/अमरकंटक। सावन माह के द्वितीय सोमवार को पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने छत्तीसगढ़ की सुख-शांति और समृद्धि के संकल्प के साथ 151 किलोमीटर लंबी कांवड़ यात्रा का शुभारंभ किया। उन्होंने माँ नर्मदा मंदिर, अमरकंटक में विधिवत पूजन-अर्चन कर नर्मदा जल के साथ भोरमदेव मंदिर तक पदयात्रा प्रारंभ की।
इस अवसर पर भावना बोहरा ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि यह आस्था, अनुशासन, पर्यावरण प्रेम और हमारी सनातन संस्कृति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण रीति है। यह यात्रा हमारे लोक और आस्था को जोड़ने वाली अद्भुत परंपरा है।
यात्रा प्रारंभ से पहले रविवार की शाम उन्होंने नया नगर पालिक परिसर, अमरकंटक में आयोजित भजन संध्या में भाग लिया और बड़ी संख्या में उपस्थित कांवड़ यात्रियों को भोजन परोसकर सेवा भाव भी दिखाया। इस दौरान लगभग 3000 से अधिक श्रद्धालु कबीरधाम जिले से पहुंचे थे, जिन्होंने भजन-संकीर्तन के साथ पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया।
21 जुलाई सोमवार को अमरकंटक से यात्रा की शुरुआत के दौरान लगभग 1000 से अधिक श्रद्धालु, भाजपा के जिला एवं मंडल पदाधिकारी, महिला मोर्चा की कार्यकर्ता और पंडरिया विधानसभा के कार्यकर्ता मौजूद रहे। भावना बोहरा के साथ 300 से अधिक कांवड़ यात्री पदयात्रा में सहभागी बने, जिन्होंने हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों के साथ जंगलों के रास्ते छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि की भावना से यात्रा प्रारंभ की।
यात्रा का पहला पड़ाव अमरकंटक से लम्हनी तक तय किया गया है। आगामी दिनों में यह यात्रा प्रतिदिन तय अंतराल में आगे बढ़ेगी और 27 जुलाई को डोंगरिया महादेव और भोरमदेव मंदिर पहुंचकर विधिवत जलाभिषेक कर संपन्न होगी।
भावना बोहरा ने इस अवसर पर कहा,
“यह यात्रा मेरे लिए महज एक धार्मिक कर्तव्य नहीं बल्कि माँ नर्मदा और भोलेनाथ के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का माध्यम है। मैं इस पदयात्रा के जरिये अपने क्षेत्र, जिले और पूरे छत्तीसगढ़ की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करती हूँ। आप सभी के साथ और भोलेनाथ के आशीर्वाद से यह यात्रा अवश्य सफल होगी।”
उन्होंने आगे कहा कि आने वाली पीढ़ियों को हमारी सांस्कृतिक विरासत, परंपरा और धार्मिक आस्था से जोड़ना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है और यह यात्रा उसी का एक सार्थक प्रयास है।
पंडरिया विधायक भावना बोहरा की यह पदयात्रा न केवल धार्मिक संकल्प है, बल्कि एक सामाजिक-सांस्कृतिक संदेश भी है, जो पूरे छत्तीसगढ़ में श्रद्धा और प्रेरणा का स्रोत बन रही है।





